कहीं आपके किचन का ये बर्तन चुपके से आपको बीमार तो नहीं कर रहा?
आजकल के मॉडर्न किचन की सबसे बड़ी पहचान बन गए हैं नॉन-स्टिक बर्तन. खाना चिपकता नहीं, तेल कम लगता है, और साफ़ करने में भी बेहद आसान. यही वजह है कि आज हर घर में नॉन-स्टिक कड़ाही और पैन ने अपनी जगह बना ली है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस बर्तन को आप अपनी सेहत का दोस्त समझ रहे हैं, वो असल में आपके परिवार की सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है?
यह सुनने में थोड़ा डरावना लग सकता है, लेकिन सच यही है.
नॉन-स्टिक बर्तनों का वो काला सच
इन बर्तनों के ऊपर एक ख़ास तरह की परत चढ़ी होती है, जिसे 'टेफ्लॉन' कहते हैं. यही वो परत है जो खाने को चिपकने नहीं देती. लेकिन असली समस्या इसी परत के साथ है. यह टेफ्लॉन एक केमिकल 'पॉलीटेट्राफ्लूरोएथिलीन' (PTFE) से बनता है, जिसमें परफ्लूरोक्टेनोइक एसिड (PFOA) नाम का एक और ख़तरनाक केमिकल पाया जाता था, जिसे अब कई कंपनियां इस्तेमाल नहीं करने का दावा करती हैं.
समस्या तब शुरू होती है, जब हम इन बर्तनों को तेज़ आंच पर गर्म करते हैं.
- जब हवा में घुलने लगता है ज़हर: जैसे ही आप नॉन-स्टिक पैन को तेज़ आंच पर चढ़ाते हैं, सिर्फ़ 2 से 5 मिनट के अंदर ही इसकी कोटिंग ज़हरीले धुएं और कण छोड़ना शुरू कर देती है. ये इतने छोटे होते हैं कि हमें नज़र भी नहीं आते और सांस के ज़रिए सीधे हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं. इससे आपको 'टेफ्लॉन फ्लू' हो सकता है, जिसके लक्षण बिल्कुल आम फ्लू जैसे होते हैं- सिरदर्द, बदन दर्द, और ठंड लगना. आप इसे मौसम का असर समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि असल वजह आपकी कड़ाही होती है.
- खरोंच लगने पर खाना बन जाता है धीमा ज़हर: अक्सर हम स्टील या नुकीले चम्मच से इन बर्तनों को खुरच देते हैं, जिससे इन पर हल्की-हल्की खरोंचें आ जाती हैं. ये खरोंचें सिर्फ़ बर्तन को ख़राब नहीं करतीं, बल्कि हर बार खाना बनाने पर टेफ्लॉन के ज़हरीले कण खाने में मिलकर सीधे हमारे पेट में चले जाते हैं. ये केमिकल शरीर से आसानी से बाहर नहीं निकलते और धीरे-धीरे जमा होकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं.
- सिर्फ़ कैंसर ही नहीं, और भी हैं ख़तरे: रिसर्च बताती है कि इन बर्तनों में पाए जाने वाले केमिकल्स का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से थायराइड, लिवर और किडनी की बीमारियां होने का ख़तरा बढ़ जाता है. इतना ही नहीं, यह महिलाओं और पुरुषों, दोनों की प्रजनन क्षमता (fertility) पर भी बुरा असर डाल सकता है.
तो क्या करें? फेंक दें अपने नॉन-स्टिक बर्तन?
एकदम से फेंकना शायद मुमकिन न हो, लेकिन कुछ सावधानियां बरतकर आप इसके ख़तरे को कम कर सकते हैं:
- तेज़ आंच पर कभी न पकाएं: इन बर्तनों का इस्तेमाल हमेशा धीमी या मीडियम आंच पर ही करें.
- खरोंच लगने से बचाएं: कभी भी स्टील के चम्मच का इस्तेमाल न करें. हमेशा लकड़ी या सिलिकॉन के चम्मच का ही प्रयोग करें. अगर बर्तन पर खरोंच आ गई है, तो उसे तुरंत इस्तेमाल करना बंद कर दें.
- पुराने और सेहतमंद विकल्पों पर लौटें: कोशिश करें कि अपनी रसोई में धीरे-धीरे लोहे, स्टील, मिट्टी या पीतल के बर्तनों को वापस जगह दें. ये शायद साफ़ करने में थोड़ी ज़्यादा मेहनत मांगते हैं, लेकिन ये आपकी सेहत के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हैं.
याद रखिए, सेहत से बड़ा कोई ख़ज़ाना नहीं है. कम तेल खाने के चक्कर में हम अपनी ज़िंदगी को ही दांव पर नहीं लगा सकते. थोड़ा बदलिए, और अपनी रसोई को सेहतमंद बनाइए.