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April 05 2026 02:04 am

Som Pradosh Vrat 2026 : 30 मार्च को साल का पहला सोम प्रदोष व्रत, महादेव की पूजा से दूर होगा चंद्र दोष, जानें मुहूर्त और विधि

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News India Live, Digital Desk: मार्च 2026 का समापन एक अत्यंत शुभ संयोग के साथ हो रहा है। 30 मार्च, सोमवार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। सोमवार के दिन त्रयोदशी तिथि होने के कारण इसे 'सोम प्रदोष व्रत' कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, सोम प्रदोष का व्रत रखने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कुंडली में अशुभ चंद्रमा के प्रभाव (चंद्र दोष) से मुक्ति मिलती है। यह व्रत मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए रामबाण माना गया है।

सोम प्रदोष व्रत 2026: तिथि और पूजा का सटीक मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में की गई पूजा का फल अनंत गुना होता है:

सोम प्रदोष तिथि: 30 मार्च 2026, सोमवार।

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 30 मार्च को सुबह 08:15 बजे से।

त्रयोदशी तिथि समाप्त: 31 मार्च को सुबह 06:10 बजे तक।

पूजा का शुभ समय (प्रदोष काल): शाम 06:38 बजे से रात 08:54 बजे तक। इस समय में की गई शिव आराधना सीधे महादेव तक पहुँचती है।

कुंडली से 'चंद्र दोष' दूर करने के विशेष उपाय

यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या आप मानसिक तनाव और अनिर्णय की स्थिति में रहते हैं, तो सोम प्रदोष पर ये उपाय अवश्य करें:

दूध से अभिषेक: शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध अर्पित करें। इससे मन को शीतलता मिलती है और चंद्र देव प्रसन्न होते हैं।

चांदी का दान: इस दिन सामर्थ्य अनुसार चांदी की कोई वस्तु या सफेद वस्त्र का दान किसी ब्राह्मण को दें।

चंद्र मंत्र का जाप: प्रदोष काल में शिव पूजा के बाद 'ॐ सों सोमाय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें।

सफेद चंदन: महादेव को सफेद चंदन का तिलक लगाएं और स्वयं भी अपने माथे पर धारण करें।

सोम प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

पूरे दिन सात्विक रहें और 'नमः शिवाय' का मानसिक जाप करते रहें।

शाम को सूर्यास्त से आधा घंटा पहले पुनः स्नान कर स्वच्छ सफेद वस्त्र पहनें।

शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें।

बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल और भस्म अर्पित करें।

अंत में सोम प्रदोष व्रत की कथा सुनें और शिव जी की आरती करें।