Slouching in Office : कमर दर्द ही नहीं ,झुककर बैठना आपकी शख्सियत के बारे में बताता है ये बातें, देखें
News India Live, Digital Desk: क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि आप ऑफिस में कैसे बैठते हैं? या आपके आस-पास के लोग किस तरह से बैठते हैं? अक्सर हम इस बात पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते, लेकिन हमारी बैठने की स्टाइल, ख़ासकर कमर झुकाकर या कंधों को नीचे करके बैठना, हमारी बॉडी लैंग्वेज का एक बहुत बड़ा हिस्सा है. और यह हमारी पर्सनालिटी, हमारे कॉन्फिडेंस और यहां तक कि हमारे अंदर क्या चल रहा है, इसका भी एक इशारा दे सकती है. यह सिर्फ़ आपके बैठने का तरीका नहीं, बल्कि आपकी शख्सियत की एक झलक है!
आपके बैठने का तरीका खोलता है आपकी 'पर्सनालिटी' का राज! जानिए क्या कहता है 'झुक कर बैठना'?
आजकल ऑफिस में काम करने वाले कई लोग घंटों एक ही जगह बैठे रहते हैं. डेस्क जॉब, कंप्यूटर पर लगातार काम करना, इन सब के चलते हमारी पॉश्चर खराब होती जा रही है. और सबसे आम आदत जो देखने को मिलती है, वो है कमर झुकाकर बैठना या जिसे हम 'झुक कर बैठना' कहते हैं.
पर क्या आपने सोचा है कि आपका इस तरह बैठना आपके बारे में क्या बताता है? सिर्फ़ आपकी सेहत को ही नहीं, बल्कि आपकी शख्सियत को लेकर भी यह कुछ ख़ास बातें कहता है:
- कमजोर आत्मविश्वास (Lack of Confidence): सबसे पहली बात जो सामने आती है, वह है आत्मविश्वास की कमी. जो लोग अक्सर झुककर या सिकुड़कर बैठते हैं, वे कभी-कभी दूसरों को यह दिखाते हैं कि उनमें आत्मविश्वास कम है. ऐसा लगता है जैसे वे खुद को छोटा दिखाना चाहते हैं या ध्यान अपनी तरफ नहीं खींचना चाहते.
- ऊर्जा की कमी या थकान (Low Energy or Fatigue): अगर आप हमेशा थके-थके या ऊर्जा की कमी महसूस करते हैं, तो आपकी बॉडी भी वही दिखाती है. झुककर बैठने का मतलब हो सकता है कि आप में उस समय कोई खास उत्साह या जोश नहीं है. यह काम के बोझ या निजी थकान का संकेत भी हो सकता है.
- निराशा या बोरियत (Disinterest or Boredom): कभी-कभी जब हम किसी काम या बातचीत में रुचि नहीं लेते, तो अनजाने में हमारी बॉडी भी रिएक्ट करती है. झुककर बैठना यह दर्शा सकता है कि आपको मौजूदा हालात में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है, या आप किसी बात से बोर हो रहे हैं.
- दबा हुआ महसूस करना (Feeling Overburdened): यह भी हो सकता है कि आप किसी बात को लेकर बहुत ज़्यादा स्ट्रेस में हों या अपने ऊपर कोई बड़ा बोझ महसूस कर रहे हों. ऐसी स्थिति में शरीर का आगे की ओर झुक जाना एक सामान्य प्रतिक्रिया है, जैसे कि आप उस बोझ से दब रहे हों.
- अंतर्मुखी स्वभाव (Introversion): जो लोग कम बोलते हैं या अपने आप में रहते हैं, वे भी कभी-कभी इस तरह बैठते हैं. यह अपने आस-पास के माहौल से दूरी बनाने या खुद को ज़्यादा ओपन न रखने की कोशिश हो सकती है.
तो क्या सिर्फ़ एक आदत से इतना कुछ पता चल जाता है?
ज़्यादातर मामलों में हाँ! बॉडी लैंग्वेज हमारी अंदरूनी भावनाओं और सोच का आईना होती है. यह ज़रूरी नहीं कि हमेशा हर कोई इन्हीं वजहों से झुके, कभी-कभी सिर्फ़ खराब बैठने की आदत भी हो सकती है. लेकिन ऑफिस जैसे प्रोफेशनल माहौल में, जहां पहली छाप बहुत मायने रखती है, आपका पॉश्चर एक महत्वपूर्ण रोल निभाता है. एक सीधा और आत्मविश्वास भरा पॉश्चर आपको ज़्यादा सक्षम और भरोसेमंद दिखाता है.
तो अगली बार जब आप बैठें, तो एक बार खुद पर ध्यान ज़रूर दें. अपनी कमर सीधी करें, कंधे पीछे खींचें, और सिर उठाकर बैठें. न सिर्फ़ इससे आपकी पीठ को आराम मिलेगा, बल्कि आप खुद भी ज़्यादा कॉन्फिडेंट और ऊर्जावान महसूस करेंगे