राजस्थान में आसमानी आफत श्रीगंगानगर में बारिश और कोहरा, 25 जिलों में आंधी-तूफान का ऑरेंज अलर्ट
News India Live, Digital Desk : राजस्थान में भीषण गर्मी की आहट के बीच मौसम ने खौफनाक पलटी मारी है। सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से में आंधी और बारिश का तांडव शुरू हो गया है। मौसम विभाग (IMD) ने राजधानी जयपुर समेत 25 जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। सबसे ज्यादा असर श्रीगंगानगर और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में देखा जा रहा है, जहां बेमौसम बारिश के साथ-साथ घने कोहरे ने मार्च के महीने में दिसंबर जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
श्रीगंगानगर में 'कुदरत का करिश्मा': बारिश के साथ कोहरे का कहर श्रीगंगानगर में सोमवार सुबह से ही मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश ने न केवल पारे को गिरा दिया है, बल्कि भारी कोहरे के कारण विजिबिलिटी 10 मीटर से भी कम रह गई है। वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के हनुमानगढ़, बीकानेर और जैसलमेर में भी मेघगर्जना के साथ बूंदाबांदी का दौर जारी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मार्च का सबसे शक्तिशाली विक्षोभ है, जिसका असर अगले दो-तीन दिनों तक रहेगा।
25 जिलों में ऑरेंज अलर्ट: 50 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं जयपुर मौसम केंद्र के मुताबिक, सोमवार और मंगलवार को प्रदेश के 25 जिलों में धूलभरी आंधी और वज्रपात (Lightning) की प्रबल संभावना है। विभाग ने अलवर, झुंझुनू, सीकर, नागौर और श्रीगंगानगर समेत कई जिलों में ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी दी है। आंधी की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जिससे कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुँच सकता है। तापमान में 3 से 4 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे तपती गर्मी से तो राहत मिली है लेकिन किसानों की फसलों पर संकट मंडरा रहा है।
अप्रैल के पहले हफ्ते तक जारी रहेगा 'लुका-छिपी' का खेल मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बैक-टू-बैक दो पश्चिमी विक्षोभों के सक्रिय होने से मौसम का यह मिजाज अप्रैल के पहले सप्ताह तक बना रह सकता है। कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां जैसे पूर्वी हिस्सों में भी बादलों की आवाजाही बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान घरों से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। विशेष रूप से किसानों को कटी हुई फसलों को ढकने और ओलावृष्टि से बचाव के इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।