Sita Navami 2026 : वैशाख माह में कब है जानकी नवमी? जानें शुभ मुहूर्त, दुर्लभ संयोग और जीवन में सुख के अचूक उपाय
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में सीता नवमी, जिसे जानकी नवमी भी कहा जाता है, माता सीता के प्राकट्य उत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन पुष्य नक्षत्र के दौरान जब राजा जनक हल चला रहे थे, तब उन्हें भूमि से एक कलश प्राप्त हुआ था जिसमें माता सीता शिशु रूप में विराजमान थीं। साल 2026 में यह पर्व बहुत ही शुभ और दुर्लभ संयोगों के साथ आ रहा है।
सीता नवमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग की गणना के अनुसार, साल 2026 में सीता नवमी की तिथियां इस प्रकार हैं:
नवमी तिथि प्रारंभ: 25 अप्रैल 2026, शाम 07:44 बजे से।
नवमी तिथि समाप्त: 26 अप्रैल 2026, रात 09:32 बजे तक।
उदया तिथि: उदया तिथि के अनुसार, सीता नवमी का पर्व 26 अप्रैल 2026, रविवार को मनाया जाएगा।
पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त (Madhyahna Puja Muhurat)
माता सीता का प्राकट्य दोपहर के समय हुआ था, इसलिए मध्याह्न काल की पूजा सबसे फलदायी मानी जाती है:
पूजा मुहूर्त: सुबह 10:43 बजे से दोपहर 01:21 बजे तक।
कुल अवधि: 2 घंटे 38 मिनट।
बन रहे हैं दुर्लभ संयोग
इस वर्ष सीता नवमी पर रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, रवि पुष्य योग में की गई पूजा और खरीदारी अक्षय फल प्रदान करती है। इस दिन भगवान राम और माता सीता की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
सुख-समृद्धि के लिए विशेष उपाय (Special Upay)
सीता नवमी के दिन अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए आप ये सरल उपाय कर सकते हैं:
सुखी दांपत्य के लिए: माता सीता को सुहाग की सामग्री (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां) अर्पित करें और बाद में इसे किसी सुहागिन महिला को दान कर दें।
आर्थिक लाभ के लिए: इस दिन जानकी स्तोत्र का पाठ करें और केसरिया चावल का भोग लगाएं।
कष्टों से मुक्ति: राम रक्षा स्तोत्र या "ॐ श्री सीतायै नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
दान का महत्व: इस दिन प्यासों को पानी पिलाना और भूखों को अन्न दान करना विशेष पुण्यकारी माना गया है।