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April 10 2026 03:04 pm

SIP Investment 2026: एफडी और सोने का मोह छोड़ रहे भारतीय! देश में आया 'SIP' का बंपर तूफान, जानिए कैसे 5000 रुपये से बन रहे करोड़पति

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नई दिल्ली: एक समय था जब भारतीय परिवारों में पैसा बचाने का मतलब सिर्फ बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रेकरिंग डिपॉजिट (RD), तिजोरी में रखा नकद या फिर सोना खरीदना होता था। पहले लोग सिर्फ पैसों की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर तुरंत नकद (Liquidity) मिलने पर ध्यान देते थे, उनकी ग्रोथ पर नहीं। लेकिन, पिछले 5 से 7 सालों में देश की आर्थिक सोच में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव आया है। भारत अब तेजी से 'बचत-फर्स्ट' से 'SIP-फर्स्ट' देश में तब्दील हो रहा है। लंबी अवधि में मोटा फंड बनाने के लिए अब भारतीय परिवारों की पहली पसंद म्यूचुअल फंड्स का सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) बन गया है।

SIP खातों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, 16 लाख करोड़ के पार पहुंचा एसेट

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़े इस बदलाव की गवाही दे रहे हैं। देश में एक्टिव SIP खातों की संख्या 9.92 करोड़ के पार जा चुकी है। वहीं, SIP के जरिए कुल निवेश (AUM) 16.36 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर को छू चुका है। आपको बता दें कि यह पूरी म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के 80 लाख करोड़ रुपये के कुल एसेट का लगभग 20 फीसदी हिस्सा है। यह भारी-भरकम आंकड़ा रातों-रात नहीं बना, बल्कि यह निवेशकों की लगातार बढ़ती भागीदारी का नतीजा है।

आखिर कैसे आया निवेश की सोच में यह बड़ा बदलाव?

मीरा मनी (MIRA Money) के को-फाउंडर आनंद के राठी इस ट्रेंड को एक 'सांस्कृतिक बदलाव' मानते हैं, जो धीरे-धीरे पनपा है। उनका कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने निवेश की प्रक्रिया को अब मोबाइल के एक क्लिक जितना आसान कर दिया है। इसके अलावा, लोगों को अब यह हकीकत समझ में आने लगी है कि FD जैसी पारंपरिक बचत योजनाएं महंगाई (Inflation) की रफ्तार को मात देने में पीछे रह जाती हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2016-17 में हर महीने का औसत SIP इनफ्लो 4,000 करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब एक दशक से भी कम समय में आठ गुना बढ़कर करीब 31,000 करोड़ रुपये प्रति माह हो गया है। वहीं, सालाना SIP निवेश 45,000 करोड़ से उछलकर 2.9 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। सबसे खास बात यह है कि नोटबंदी, कोरोना महामारी और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता भी निवेशकों का हौसला नहीं डिगा सकी और बाजार गिरने पर भी लोगों ने अपनी SIP बंद नहीं की।

अब 'खर्च के बाद बचत' नहीं, 'निवेश के बाद खर्च' का है ट्रेंड

मिडिल क्लास परिवारों के लिए SIP ने निवेश में एक गजब का अनुशासन ला दिया है। इसे लोग अब अपने भविष्य की EMI की तरह देखने लगे हैं। वाइज फिनसर्व (Wise Finserv) की ग्रुप डायरेक्टर और सीओओ चारु पाहुजा के मुताबिक, रिटेल निवेशकों ने यह जान लिया है कि SIP सिर्फ बाजार में पैसा लगाने का जरिया नहीं, बल्कि लंबी अवधि के आर्थिक लक्ष्यों की ओर लगातार बढ़ने का एक अचूक हथियार है। यह बाजार के उतार-चढ़ाव को संतुलित करता है और अनुशासन बनाए रखता है। इसके अलावा, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में पारंपरिक विकल्पों के मुकाबले बेहतर टैक्स छूट भी मिलती है।

महंगाई का सबसे बड़ा दुश्मन है SIP

विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई को एडजस्ट करने के बाद FD का असली रिटर्न अक्सर जीरो या कभी-कभी नेगेटिव ही रह जाता है। लोग अब समझ रहे हैं कि सिर्फ पैसा जमा करके रखने से उसकी 'परचेजिंग पावर' (खरीदने की ताकत) सुरक्षित नहीं रहती। यही कारण है कि लोग इक्विटी आधारित SIP की तरफ भाग रहे हैं, जिसने ऐतिहासिक रूप से लंबी अवधि में 10 से 12 प्रतिशत का शानदार औसत रिटर्न दिया है। आज का जागरूक निवेशक बाजार गिरने पर घबराकर पैसा नहीं निकालता, बल्कि 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' (Rupee Cost Averaging) के जरिए सस्ते में ज्यादा यूनिट्स खरीदकर इस गिरावट का पूरा फायदा उठाता है।

कंपाउंडिंग का जादू: 5000 रुपये से ऐसे बनेंगे 1 करोड़

आज के युवा निवेशकों को लंबी अवधि की 'कंपाउंडिंग की ताकत' (Power of Compounding) सबसे ज्यादा लुभा रही है। आनंद राठी एक बेहतरीन उदाहरण देते हुए समझाते हैं कि अगर कोई व्यक्ति 30 साल तक हर महीने सिर्फ 5,000 रुपये की SIP करता है और उस पर 12% का अनुमानित औसत रिटर्न मिलता है, तो 30 साल बाद उसके पास 1 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का भारी-भरकम फंड तैयार हो सकता है। सोशल मीडिया की वित्तीय जागरूकता और ऑनलाइन कैलकुलेटर्स ने इस गणित को आम आदमी तक आसानी से पहुंचा दिया है।

बचत से आगे बढ़कर मजबूत हो रहा है घरेलू बाजार

आज भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में आने वाला हर पांचवां रुपया SIP के जरिए आ रहा है। चारु पाहुजा का कहना है कि भारतीय लोगों ने बचत करना नहीं छोड़ा है, बल्कि अब वे अपने पैसों को ज्यादा 'प्रोडक्टिव' दिशा में लगा रहे हैं। इससे विदेशी निवेशकों पर हमारी निर्भरता कम हो रही है और घरेलू बाजार लगातार मजबूत हो रहा है। देश का 'SIP-फर्स्ट' की ओर यह कदम भारतीय परिवारों की अगली फाइनेंशियल मैच्योरिटी को साबित करता है।