Short Sleeper Syndrome: 4 से 6 घंटे की नींद में भी जो रहते हैं पूरी तरह फिट जानें क्या है यह दुर्लभ स्थिति
News India Live, Digital Desk: Short Sleeper Syndrome: हम सभी जानते हैं कि अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त नींद कितनी जरूरी है। सामान्यतः, एक वयस्क व्यक्ति को हर रात 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है ताकि वह दिन भर तरोताजा और ऊर्जावान महसूस कर सके। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे लोगों के बारे में सुना है जिन्हें सिर्फ 4 से 6 घंटे की नींद ही काफी होती है और वे फिर भी पूरी तरह तरोताजा और सक्रिय महसूस करते हैं? यह कोई मिथक नहीं, बल्कि एक दुर्लभ लेकिन वास्तविक चिकित्सीय स्थिति है जिसे "शॉर्ट स्लीपर सिंड्रोम" कहा जाता है।
यह समझना बहुत ज़रूरी है कि शॉर्ट स्लीपर सिंड्रोम का मतलब नींद की कमी (स्लीप डिप्राइवेशन) से बिलकुल नहीं है। नींद की कमी में व्यक्ति को कम नींद के बाद थकावट, एकाग्रता में कमी और चिड़चिड़ापन महसूस होता है, जबकि शॉर्ट स्लीपर सिंड्रोम वाले व्यक्ति अपनी कम नींद में भी पूर्ण विश्राम महसूस करते हैं और दिन भर ऊर्जावान बने रहते हैं। उनके लिए 4-6 घंटे की नींद ही गुणवत्तापूर्ण होती है, जहाँ उनके मस्तिष्क और शरीर को पूरी तरह से रिकवर होने का समय मिल जाता है।
यह स्थिति बेहद दुर्लभ है, माना जाता है कि दुनिया की एक प्रतिशत से भी कम आबादी इस सिंड्रोम से प्रभावित है। वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि इस सिंड्रोम के पीछे आनुवंशिक कारण हो सकते हैं, जिसमें DEC2 जैसे कुछ विशेष जीन्स की भूमिका पाई गई है। यह एक स्वाभाविक शारीरिक अनुकूलन है, न कि कोई बुरी आदत या जीवनशैली का परिणाम। ऐसे व्यक्तियों को अक्सर अधिक आशावादी, फुर्तीले और मानसिक रूप से मजबूत पाया जाता है। वे उच्च तनाव को झेलने और कई काम एक साथ करने में भी सक्षम हो सकते हैं। कुछ अध्ययनों ने यह भी सुझाव दिया है कि ऐसे लोग बेहतर चयापचय और दर्द सहने की उच्च क्षमता रखते हैं।
लेकिन यहां एक चेतावनी बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आप पर्याप्त नींद न मिलने के कारण खुद को थका हुआ या चिड़चिड़ा महसूस करते हैं और सोचते हैं कि आप एक 'शॉर्ट स्लीपर' हैं, तो आप संभवतः 'नींद की कमी' के शिकार हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। पर्याप्त नींद न लेने से हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा और संज्ञानात्मक क्षमताओं में कमी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। यह अपने आप को धोखे में रखने जैसा है।
यदि आपको वास्तव में संदेह है कि आप शॉर्ट स्लीपर सिंड्रोम से प्रभावित हो सकते हैं, तो आत्म-निदान करने के बजाय किसी विशेषज्ञ चिकित्सक या नींद विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है। पॉलीसोम्नोग्राफी (नींद अध्ययन) जैसे परीक्षण इस स्थिति की पुष्टि करने में मदद कर सकते हैं। वे आपके नींद के पैटर्न और उसकी गुणवत्ता का विश्लेषण करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आप स्वस्थ तरीके से कम सो रहे हैं, या आपको अपनी नींद की आदतों में सुधार करने की आवश्यकता है।
संक्षेप में, शॉर्ट स्लीपर सिंड्रोम एक अद्वितीय आनुवंशिक स्थिति है जहाँ व्यक्ति स्वाभाविक रूप से कम नींद में भी पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करता है। यह रातों की नींद खराब करने वाली बुरी आदत से पूरी तरह अलग है। हमेशा अपनी शरीर की ज़रूरतों को समझें और स्वस्थ जीवनशैली के लिए पर्याप्त नींद को प्राथमिकता दें, जब तक कि चिकित्सकीय रूप से कुछ और सिद्ध न हो जाए।