Sheetla Saptami 2026 Today: आज है शीतला सप्तमी, जानें माता को बासी भोग लगाने का महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त

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लखनऊ, ब्यूरो।आज यानी 10 मार्च 2026, मंगलवार को देशभर में शीतला सप्तमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार आरोग्य, स्वच्छता और शीतलता की देवी माता शीतला को समर्पित है। इस पर्व को विशेष रूप से 'बासोड़ा' (Basoda) के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन माता को ताजे भोजन के बजाय एक दिन पहले बने हुए 'बासी' भोजन का भोग लगाया जाता है।

आज पूजा का शुभ मुहूर्त (10 मार्च 2026)

माता शीतला की पूजा के लिए आज दिनभर शुभ समय उपलब्ध है। यदि आप आज पूजन कर रहे हैं, तो इन समयों का ध्यान रखें:

पूजा का समय: सुबह 06:04 AM से शाम 05:56 PM तक।

विशेष मान्यता: माता शीतला की पूजा सूर्योदय के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है।

क्यों लगाया जाता है बासी भोजन का भोग?

शीतला सप्तमी और अष्टमी ऐसे दिन हैं जब घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से इसका महत्व है:

धार्मिक कारण: मान्यता है कि माता शीतला को ठंडी चीजें प्रिय हैं। सप्तमी की रात को भोजन (जैसे मीठे चावल, पूड़ी, राबड़ी) तैयार किया जाता है और आज यानी सप्तमी/अष्टमी के दिन वही ठंडा भोजन माता को अर्पित कर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

वैज्ञानिक/स्वास्थ्य कारण: चैत्र मास से गर्मी का मौसम शुरू होता है। शीतला माता का व्रत हमें संदेश देता है कि अब खान-पान में सावधानी बरतने और शरीर को शीतल रखने का समय आ गया है। यह व्रत चेचक, खसरा और फोड़े-फुंसी जैसी बीमारियों से रक्षा के लिए किया जाता है।

माता शीतला के लिए विशेष भोग: मीठे चावल

आज के दिन माता शीतला को गुड़ या गन्ने के रस से बने मीठे चावलों का भोग लगाना अनिवार्य माना जाता है। इसे सप्तमी की रात को ही बना लिया जाता है।

आज क्या न करें: आज घर में ताजा खाना न बनाएं और न ही गर्म भोजन का सेवन करें।

प्रसाद वितरण: पूजा के बाद इस ठंडे प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों, विशेषकर बच्चों को जरूर खिलाएं, क्योंकि यह उनके आरोग्य की रक्षा करता है।

शीतला सप्तमी का विशेष महत्व

संतान की रक्षा: महिलाएं यह व्रत मुख्य रूप से अपनी संतान की लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए रखती हैं।

बीमारियों से मुक्ति: माना जाता है कि जो परिवार विधि-विधान से माता शीतला की पूजा करता है, उसे सालभर त्वचा रोग और गर्मी से होने वाली बीमारियों का सामना नहीं करना पड़ता।

स्वच्छता का संदेश: माता शीतला के एक हाथ में झाड़ू और दूसरे में कलश होता है, जो हमें जीवन में स्वच्छता और जल के महत्व को समझने की प्रेरणा देता है।