Sheetala Ashtami 2026 : कब है शीतला अष्टमी? जानें क्यों गधे की सवारी करती हैं माता और क्यों लगाया जाता है बासी खाने का भोग
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी, जिसे बासोड़ा (Basoda) भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार मुख्य रूप से होली के आठवें दिन मनाया जाता है। साल 2026 में शीतला अष्टमी की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन बासी भोजन करने के पीछे के वैज्ञानिक व धार्मिक कारणों को लेकर काफी चर्चा है। आइए जानते हैं इस दिन से जुड़ी हर जरूरी बात।
शीतला अष्टमी 2026 की सही तारीख और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है।
तारीख: साल 2026 में शीतला अष्टमी 10 मार्च, मंगलवार को मनाई जा रही है।
शुभ मुहूर्त: पूजा का सबसे उत्तम समय सूर्योदय से लेकर सुबह के नौ बजे तक माना जाता है।
माता शीतला गधे की सवारी क्यों करती हैं?
शीतला माता को स्वच्छता और आरोग्यता की देवी माना जाता है। उनकी सवारी और स्वरूप के पीछे गहरा अर्थ छिपा है:
गधा: गधा बेहद सहनशील और धैर्यवान प्राणी माना जाता है। माता की यह सवारी संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए।
स्वरूप: माता के एक हाथ में झाड़ू (स्वच्छता का प्रतीक) और दूसरे में नीम के पत्ते (औषधि का प्रतीक) होते हैं, जो बीमारियों से रक्षा का संकेत देते हैं।
बासोड़ा का महत्व: क्यों खाते हैं ठंडा भोजन?
इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलता और माता को एक दिन पहले बने भोजन का भोग लगाया जाता है।
वैज्ञानिक कारण: चैत्र मास से गर्मी की शुरुआत होती है। ठंडा भोजन करने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है और संक्रमण (जैसे चेचक या खसरा) का खतरा कम होता है।
धार्मिक मान्यता: माना जाता है कि माता शीतला को ठंडी चीजें प्रिय हैं, इसलिए उन्हें शीतल नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
पूजा विधि के मुख्य स्टेप्स:
सुबह जल्दी उठकर ठंडे पानी से स्नान करें।
माता को दही, राबड़ी, हलवा और पूरी का भोग लगाएं (जो सप्तमी की रात को बनाया गया हो)।
पूजा के बाद बचा हुआ जल घर के कोनों में छिड़कें, इसे आरोग्यता का प्रतीक माना जाता है।