Sharadiya Navratri 2025 : क्या आप जानते हैं कलश विसर्जन कैसे करना है? गलती हुई तो पड़ सकता है भारी
News India Live, Digital Desk: नवरात्रियाँ तो हम सब मनाते हैं और माँ दुर्गा की भक्ति में नौ दिन लीन रहते हैं. इन पवित्र दिनों की शुरुआत 'घटस्थापना' या 'कलश स्थापना' से होती है, जहाँ हम विधि-विधान से कलश स्थापित करते हैं और उसमें जौ बोते हैं. अब जब माँ की पूजा और आराधना पूरी हो जाती है, तो बारी आती है 'कलश विसर्जन' (Kalash Visarjan) की, जो इस पूरी पूजा का एक अहम हिस्सा है. आइए, सरल शब्दों में समझते हैं कि ये क्या है, कब होता है और कैसे किया जाता है.
कलश विसर्जन क्यों करते हैं?
कलश विसर्जन का मतलब है देवी का आह्वान करने के बाद, पूजा पूरी होने पर, उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करना. यह हमें सिखाता है कि जीवन में हर चीज़ की एक शुरुआत और एक अंत होता है. कलश में हम जिन नवग्रहों और देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं, विसर्जन के ज़रिए हम उनसे विदा लेते हुए, जीवन में सुख-समृद्धि बनाए रखने का आशीर्वाद मांगते हैं. यह हमें दिखाता है कि माँ हमारे साथ हैं, भले ही हम उन्हें विदा क्यों न दे दें.
कब होगा 2025 में कलश विसर्जन (तिथि और मुहूर्त)?
आमतौर पर, नवरात्रि के दसवें दिन यानी दशहरा या विजयादशमी (Vijaya Dashami) पर कलश विसर्जन किया जाता है. शारदीय नवरात्रि 2025 में इसकी तारीखें (अंतिम और सटीक तिथि और मुहूर्त के लिए पंचांग या स्थानीय पंडित जी से सलाह लें, क्योंकि यह हर क्षेत्र के लिए थोड़ा बदल सकता है) इसी दशहरे के आस-पास रहेंगी.
दशहरे के दिन शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) में ही विसर्जन किया जाता है. यह मुहूर्त आमतौर पर दोपहर में आता है. पंचांग देखकर या किसी जानकार पंडित से सही समय ज़रूर पता कर लें.
कलश विसर्जन की विधि (कैसे करें?)
कलश विसर्जन का तरीक़ा बहुत सीधा और भक्तिपूर्ण होता है. इसे घर में या किसी पवित्र स्थान पर कर सकते हैं:
- माँ से प्रार्थना: सबसे पहले, पूजा वाली जगह पर जाएँ. माँ दुर्गा से इन नौ दिनों में की गई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें और उन्हें आपके घर में आने व आशीर्वाद देने के लिए धन्यवाद दें.
- फूल-माला उतारें: कलश पर चढ़ी फूल-मालाएं, पत्ते आदि धीरे-धीरे हटा दें.
- जल का उपयोग: कलश के जल को पहले घर में सभी जगहों पर थोड़ा-थोड़ा छिड़क दें. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है. बचे हुए जल को तुलसी या किसी अन्य पेड़-पौधे की जड़ों में अर्पित कर दें (लेकिन तुलसी में चढ़ाते समय बहुत कम मात्रा में छिड़काव करें, अधिक न दें). यह जल बहुत पवित्र माना जाता है.
- जवारे (जौ) का क्या करें? जौ जो कलश के साथ बोए थे, उनमें से कुछ को तोड़कर अपने पैसे रखने की जगह या तिजोरी में रख लें. यह धन-धान्य की वृद्धि का प्रतीक माना जाता है. बाकी जवारों को किसी नदी, तालाब या बहते पानी में विसर्जित कर दें. अगर ये संभव न हो तो उन्हें भी पेड़-पौधों में अर्पित कर सकते हैं.
- नारियल और प्रसाद: कलश के ऊपर रखे नारियल को फोड़कर सभी को प्रसाद के रूप में बाँटें. नौ दिनों का फल यह नारियल होता है, इसलिए इसे ज़रूर खाना चाहिए.
- कलश और मिट्टी: कलश के पात्र को साफ करके अगली पूजा के लिए संभाल कर रख लें. अगर आपने मिट्टी के दीये या मिट्टी के बर्तन का उपयोग किया है तो उन्हें भी साफ करके रखा जा सकता है या मिट्टी के स्वरूप में विसर्जित कर सकते हैं. मिट्टी के गणेश या लक्ष्मी प्रतिमाएं अक्सर नदी में विसर्जित की जाती हैं.
- आरती और दान: विसर्जन से पहले माँ की एक आख़िरी आरती करें और अपनी क्षमतानुसार कुछ दान-पुण्य भी कर सकते हैं.
विसर्जन मंत्र:
कलश विसर्जन के दौरान आप माँ दुर्गा के मूल मंत्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" का जाप कर सकते हैं, या देवी से विदा लेते हुए कहें:
"गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि,
पूजादिं सफलं कृत्वेदं सर्वं प्रसाद्मे."
(हे परमेश्वरी देवी, आप श्रेष्ठ स्थान को गमन करें, हमारी पूजा को सफल बनाएं और हम पर कृपा बरसाएं.)
इस तरह से, कलश विसर्जन माँ दुर्गा की उपासना का एक सुंदर और संतोषजनक अंत होता है, जो हमें अगले साल फिर से उनके आगमन का इंतज़ार करने की प्रेरणा देता है.