यूपी पुलिस के लिए शर्मनाक दिन प्रधान को घर से उठाया, फर्जी एनकाउंटर दिखाया और अब 17 पुलिसवालों पर FIR

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News India Live, Digital Desk: हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि पुलिस हमारी सुरक्षा के लिए होती है। लेकिन उत्तर प्रदेश से एक ऐसी खबर आई है जिसने इस भरोसे को हिलाकर रख दिया है। यह मामला किसी अपराधी का नहीं, बल्कि उन पुलिसवालों का है जिन्होंने कथित तौर पर वर्दी का गलत इस्तेमाल किया। सोचिए, एक ग्राम प्रधान को उसके घर से उठा लिया जाता है और फिर दुनिया को एक 'एनकाउंटर' की कहानी सुनाई जाती है। लेकिन अब, कानून का डंडा चला है और कहानी पूरी तरह पलट गई है।

क्या है पूरा माजरा?

यह घटना एक ग्राम प्रधान (Village Head) से जुड़ी है। आरोप है कि पुलिस की एक टीम, जिसमें थानेदार (SHO) और एसओजी (SOG) प्रभारी शामिल थे, प्रधान के घर धमकती है। वहां से उन्हें किसी अपराधी की तरह उठा ले जाया जाता है। परिवार वाले चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी।

इसके बाद जो हुआ, वो और भी खौफनाक था। पुलिस ने कथित तौर पर इसे एक 'एनकाउंटर' (Encounter) या मुठभेड़ के रूप में पेश किया। यानी पुलिस की कहानी यह थी कि गोलीबारी हुई और जवाबी कार्रवाई की गई। लेकिन प्रधान के परिवार ने हार नहीं मानी। वो जानते थे कि उनके घर के सदस्य को घर से उठाया गया था, न कि किसी जंगल में मुठभेड़ हुई थी।

कोर्ट ने दिया न्याय का साथ

परिवार ने इंसाफ के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। जब कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखा और सबूतों पर गौर किया, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।

पुलिसवाले खुद बने मुजरिम

इस मामले में अब SHO, SOG प्रभारी और 15 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण और साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कोई छोटी बात नहीं है। जिन कन्धों पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी थी, आज वही लोग FIR की कॉपी में आरोपी बनकर दर्ज हैं।

सिस्टम पर उठते सवाल

यह घटना सिर्फ एक केस नहीं है, यह एक चेतावनी है। यह बताता है कि कैसे कभी-कभी पावर का नशा किसी को भी अंधा कर सकता है। अगर कोर्ट ने दखल न दिया होता, तो शायद यह मामला भी फाइलों में कहीं दब कर रह जाता और एक फर्जी कहानी सच मान ली जाती।

अब देखना यह होगा कि जांच आगे कैसे बढ़ती है और क्या पीड़ित परिवार को पूरा इंसाफ मिल पाता है या नहीं। लेकिन एक बात तय है कानून से ऊपर कोई नहीं, चाहे वो वर्दी वाला ही क्यों न हो।