वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में गम का साया, भारत-ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी क्यों काली पट्टी बांधकर मैदान पर उतरे?

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News India Live, Digital Desk : T20 वर्ल्ड कप 2025 का दूसरा सेमीफाइनल ,एक तरफ भारत, दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया। पूरी दुनिया की नजरें इस महामुकाबले पर टिकी थीं। हर गेंद पर रोमांच चरम पर था। लेकिन इस हाई-वोल्टेज मैच के बीच एक ऐसा पल भी आया, जिसने स्टेडियम में बैठे दर्शकों से लेकर टीवी पर मैच देख रहे करोड़ों लोगों को थोड़ा भावुक कर दिया।

मैच के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया, दोनों ही टीमों के खिलाड़ी अपनी बांह पर काली पट्टी (Black Armbands) बांधकर खेल रहे थे। अक्सर खिलाड़ी किसी दुखद घटना पर शोक व्यक्त करने के लिए ऐसा करते हैं। ऐसे में सबके मन में यह सवाल उठने लगा कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि वर्ल्ड कप के इतने बड़े मैच में दोनों टीमों ने एक साथ यह फैसला लिया?

बेन ऑस्टिन: वो युवा सितारा जो बहुत जल्दी बुझ गया

इसका जवाब छिपा था ऑस्ट्रेलिया के एक युवा और उभरते हुए क्रिकेटर बेन ऑस्टिन (Ben Austin) की दुखद और असामयिक मौत में।

बेन ऑस्टिन ऑस्ट्रेलिया के एक बहुत ही प्रतिभाशाली युवा क्रिकेटर थे, जिनकी उम्र सिर्फ 20 साल थी। वह घरेलू क्रिकेट में न्यू साउथ वेल्स की टीम से खेलते थे और अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे। उन्हें ऑस्ट्रेलिया के भविष्य के सितारों में से एक माना जा रहा था। लेकिन कुछ ही दिन पहले, एक गंभीर बीमारी के कारण उनका निधन हो गया, जिससे पूरे ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

क्रिकेट जगत ने दी श्रद्धांजलि

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और आईसीसी (ICC) ने मिलकर यह फैसला किया कि इस होनहार युवा खिलाड़ी की याद और सम्मान में सेमीफाइनल मैच में दोनों टीमें अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर उतरेंगी। यह सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की तरफ से नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और भारतीय टीम ने भी इस दुख की घड़ी में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट का साथ देते हुए इस श्रद्धांजलि में हिस्सा लिया।

यह पल क्रिकेट के 'जेंटलमैन्स गेम' होने की भावना को दर्शाता है, जहां मैदान पर भले ही दो टीमें एक-दूसरे की कट्टर दुश्मन हों, लेकिन मैदान के बाहर वे एक बड़े क्रिकेट परिवार का हिस्सा हैं। विराट कोहली से लेकर पैट कमिंस तक, हर खिलाड़ी ने बेन ऑस्टिन के परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और उस युवा प्रतिभा को याद किया, जो समय से पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह गया।

इस महामुकाबले के बीच यह छोटा सा इशारा यह याद दिला गया कि खेल और प्रतियोगिता से भी ऊपर इंसानियत और एक-दूसरे के दुख में साथ खड़ा होना है।