तमिलनाडु में सीट की जंग कांग्रेस ने DMK से मांगी 45 सीटें, जानें स्टालिन का काउंटर ऑफर
News India Live, Digital Desk: तमिलनाडु की राजनीति में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बिसात बिछनी शुरू हो गई है। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान अब सार्वजनिक हो गई है। जहां कांग्रेस पिछले प्रदर्शन का हवाला देकर ज्यादा हिस्सेदारी मांग रही है, वहीं DMK अपने पास 'लायन शेयर' रखने की रणनीति पर अडिग है।
कांग्रेस की डिमांड: क्यों चाहिए 45 सीटें? (Congress Demand)
चेन्नई में हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बीच घंटों चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने इस बार 45 विधानसभा सीटों की मांग रखी है।
तर्क: कांग्रेस का कहना है कि 2021 के चुनाव में DMK ने 173 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह 40 सीटें हार गई थी। कांग्रेस का दावा है कि उन सीटों पर उसकी पकड़ ज्यादा मजबूत है।
पिछला प्रदर्शन: 2021 में कांग्रेस को 25 सीटें मिली थीं, जिनमें से उसने 18 पर जीत दर्ज की थी। इसी स्ट्राइक रेट को आधार बनाकर पार्टी अब अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है।
सम्मान की लड़ाई: तमिलनाडु कांग्रेस के नेता अब गठबंधन में केवल 'जूनियर पार्टनर' बनकर नहीं रहना चाहते, बल्कि सत्ता में भी अपनी भागीदारी (Power Sharing) तलाश रहे हैं।
DMK का 'लोअर' ऑफर: गठबंधन में दरार? (DMK Offer)
दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अगुवाई वाली DMK इतनी बड़ी संख्या में सीटें देने के पक्ष में नहीं दिख रही है।
ऑफर: खबरों की मानें तो DMK कांग्रेस को 19 से 22 सीटों के बीच सीमित रखना चाहती है।
रणनीति: DMK का मानना है कि उसे खुद कम से कम 150+ सीटों पर लड़ना चाहिए ताकि वह बिना किसी बैसाखी के बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सके।
अन्य सहयोगी: DMK को अन्य छोटे दलों (जैसे VCK, CPI, CPM) को भी साथ रखना है, जिसके लिए उसे अपने कोटे से सीटें कम करनी पड़ेंगी।