Schengen Visa New Rules : यूरोपीय देशों की यात्रा अब और भी आसान भारतीयों के लिए लागू हुआ नया Entry-Exit सिस्टम
News India Live, Digital Desk: अगर आप भी पेरिस के एफिल टावर या इटली की गलियों में घूमने का सपना देख रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है। यूरोपीय संघ (EU) ने अपने वीजा और प्रवेश नियमों में एक क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब शेंगेन देशों में एंट्री और एग्जिट की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होने जा रही है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन भारतीय पर्यटकों को मिलेगा जो अक्सर यूरोप की यात्रा करते हैं। आइए जानते हैं कि इस नए 'एंट्री-एग्जिट सिस्टम' (EES) के लागू होने के बाद आपकी पासपोर्ट स्टैम्पिंग का क्या होगा और आपको किन बातों का ध्यान रखना होगा।
पासपोर्ट पर मुहर लगाने का झंझट खत्म, अब होगा डिजिटल रिकॉर्ड
अब तक जब भी आप किसी शेंगेन देश में प्रवेश करते थे, तो आपके पासपोर्ट पर मैन्युअल तरीके से मुहर (Stamping) लगाई जाती थी। लेकिन अब ईयू के नए ईईएस (Entry-Exit System) के तहत यह प्रक्रिया इतिहास बन जाएगी। अब आपकी एंट्री और एग्जिट का रिकॉर्ड एक ऑटोमेटेड सिस्टम में दर्ज होगा। इसमें यात्री का नाम, पासपोर्ट विवरण, उंगलियों के निशान (Biometrics) और चेहरे की तस्वीर डिजिटल रूप से सुरक्षित की जाएगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए होने वाली घुसपैठ पर भी लगाम लगेगी।
भारतीय यात्रियों को क्या करना होगा?
नए नियमों के अनुसार, जब भारतीय यात्री पहली बार इस सिस्टम के लागू होने के बाद शेंगेन क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, तो उन्हें बॉर्डर कंट्रोल पर अपना बायोमेट्रिक डेटा देना होगा। इसमें चेहरे का स्कैन और फिंगरप्रिंट शामिल हैं। एक बार यह डेटा सिस्टम में फीड हो जाने के बाद, अगले तीन सालों तक आपको बार-बार यह प्रक्रिया नहीं दोहरानी होगी। यह सिस्टम उन यात्रियों पर नजर रखेगा जो वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी वहां रुक जाते हैं (Overstayers), जिससे सुरक्षा व्यवस्था और भी पुख्ता होगी।
क्या इससे वीजा मिलना आसान हो जाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजिटल सिस्टम के आने से वीजा प्रोसेसिंग में तेजी आ सकती है। चूंकि डेटा पहले से ही ईयू के डेटाबेस में मौजूद होगा, इसलिए बार-बार वेरिफिकेशन की जरूरत कम पड़ेगी। हालांकि, वीजा आवेदन की मूल प्रक्रिया में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन बॉर्डर चेकपोस्ट पर लगने वाली लंबी कतारों से अब यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब आप बिना किसी देरी के 'सेल्फ-सर्विस कियोस्क' के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
इन बातों का रखें खास ख्याल
यूरोप यात्रा पर निकलने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका पासपोर्ट कम से कम छह महीने के लिए वैध हो। साथ ही, नए सिस्टम के तहत अपना बायोमेट्रिक डेटा देते समय घबराएं नहीं, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पूरी तरह सुरक्षित है। यह सिस्टम उन सभी गैर-ईयू नागरिकों के लिए अनिवार्य है जो कम अवधि (90 दिनों तक) के लिए यूरोप जा रहे हैं।