सावधान! 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर पुलिस की वर्दी में लूट रहा खूंखार गैंग: बेनकाब हुआ ठगों का 'नकली थाना'
नई दिल्ली: अगर आपके पास भी कोई अनजान कॉल आता है जो खुद को पुलिस अधिकारी बताकर आपको डराता है, तो रुक जाइए! आप एक बेहद खतरनाक 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) स्कैम के जाल में फंस सकते हैं। साइबर अपराधी अब इतने शातिर हो चुके हैं कि वे हूबहू पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप तैयार कर मासूम लोगों को वीडियो कॉल पर धमका रहे हैं जो खाकी वर्दी पहनकर लोगों के बैंक अकाउंट खाली कर रहा था।
एक रिकॉर्डेड कॉल और शुरू होता है 'मौत का डर'
डिजिटल अरेस्ट की पटकथा एक साधारण लेकिन डरावने फोन कॉल से शुरू होती है। इस साजिश का शिकार हुए मोहित यादव ने बताया कि उनके पास एक कॉल आया, जिसमें दावा किया गया कि उनके नाम पर आए एक पार्सल में नशीले पदार्थ (Drugs) मिले हैं। इसके बाद कॉल को एक प्रोफेशनल दिखने वाले 'कॉल सेंटर' पर ट्रांसफर कर दिया गया, जहाँ ठगों ने मोहित को मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया।
व्हाट्सएप पर 'नकली थाना' और पुलिस की वर्दी का झांसा
इन ठगों का दुस्साहस देखिए—ये अपराधी व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहनकर सामने आते हैं। मोहित के मामले में ठग खुद को मुंबई के लोकमान्य तिलक थाने का अधिकारी बता रहा था। वीडियो कॉल के बैकग्राउंड में पुलिस का लोगो, सरकारी फाइलें और वायरलेस सेट की आवाजें इस कदर असली लग रही थीं कि कोई भी धोखा खा जाए। विश्वास जीतने के लिए ठग ने यहाँ तक कह दिया, "गूगल पर जाकर हमारे थाने का लैंडलाइन नंबर चेक कर लो, हम वहीं से बोल रहे हैं।"
तीन चरणों में बुना जाता है मौत का जाल
साइबर ठग अपनी इस साजिश को तीन घातक स्टेप्स में अंजाम देते हैं:
ट्रेंडिंग केस का नाम: ठग जानबूझकर उन केसों का जिक्र करते हैं जो खबरों में हों (जैसे ड्रग सिंडिकेट)।
फर्जी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट: पीड़ित को एक लिंक भेजा जाता है जो दिखने में बिल्कुल सुप्रीम कोर्ट की साइट जैसा होता है। वहां केस नंबर डालते ही पीड़ित के नाम का 'अरेस्ट वारंट' स्क्रीन पर दिखने लगता है।
बैंक बैलेंस का खेल: ठग पहले बैंक बैलेंस का स्क्रीनशॉट मांगते हैं। अगर अकाउंट में मोटी रकम है, तो केस रफा-दफा करने के नाम पर लाखों की 'प्रायोरिटी फीस' मांगी जाती है।
मोहित की जांबाजी ने उतारी ठग की खाकी
इस बार अपराधी का पाला एक सतर्क नागरिक से पड़ा। जब ठग ने केस दबाने के लिए 80 हजार रुपये की मांग की, तो मोहित डरे नहीं बल्कि उन्हें अपनी बातों में उलझा लिया। जैसे ही मोहित ने ठग का चेहरा रिकॉर्ड करना शुरू किया और सवाल पूछे, पुलिस की वर्दी में बैठा वो अपराधी बौखला गया। अपनी पोल खुलती देख वह गालियां देने लगा और तुरंत कॉल काट दिया।