BREAKING:
March 13 2026 06:37 am

मिडिल ईस्ट में महाजंग का असर: भारत सरकार का बड़ा फैसला, अब फैक्ट्रियों की गैस काटकर आपके किचन तक पहुंचेगी PNG

Post

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते युद्ध के तनाव और ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने आम आदमी की रसोई को सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने Natural Gas (Supply Regulation) Order, 2026 जारी कर घरेलू पाइप नेचुरल गैस (PNG) की निर्बाध सप्लाई को उद्योगों और व्यावसायिक जरूरतों से ऊपर प्राथमिकता दी है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब पेट्रोकेमिकल प्लांट और रिफाइनरी की गैस रोककर सबसे पहले आपके घरों के चूल्हे जलाए जाएंगे।

युद्ध के साये में 'फोर्स मेज्योर' का खतरा और समुद्री रूट की नाकेबंदी

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक गैस सप्लायर 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) यानी अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला देकर सप्लाई कम कर रहे हैं। पश्चिम एशिया के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हो रहे ड्रोन हमलों ने समुद्री सप्लाई रूट को असुरक्षित बना दिया है। भारत अपनी जरूरत की 50% से अधिक प्राकृतिक गैस इन्हीं रास्तों से आयात करता है। ऐसे में घरेलू किल्लत से बचने के लिए सरकार ने Essential Commodities Act, 1955 के तहत अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल किया है, जिससे पुराने व्यावसायिक अनुबंधों को दरकिनार कर गैस को घरेलू सेक्टर में डायवर्ट किया जा सके।

प्रायोरिटी सेक्टर-I: घरेलू PNG और CNG को मिलेगा 100% कोटा

नए सरकारी आदेश के तहत गैस वितरण के लिए प्राथमिकता तय कर दी गई है। 'प्रायोरिटी सेक्टर-I' में घरेलू PNG और वाहनों के लिए इस्तेमाल होने वाली CNG को रखा गया है। नियमों के मुताबिक, इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर 100% गैस सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी। यानी जब तक नेशनल गैस ग्रिड में गैस की एक भी बूंद उपलब्ध है, उसे सबसे पहले घरों की रसोई और पब्लिक ट्रांसपोर्ट तक पहुंचाया जाएगा। फैक्ट्रियों और पावर प्लांट्स का नंबर इसके बाद ही आएगा।

गैस कंपनियों ने दिया भरोसा, लेकिन बिल भुगतान पर बढ़ेगी सख्ती

मध्य प्रदेश की 'अवंतिका गैस लिमिटेड' (Aavantika Gas Limited) के मार्केटिंग हेड मनीष वर्मा के अनुसार, युद्ध की वजह से गैस की खरीद लागत जरूर बढ़ी है, लेकिन इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे शहरों में घरेलू सप्लाई पर आंच नहीं आने दी जाएगी। इसी तरह उत्तर प्रदेश की 'ग्रीन गैस लिमिटेड' (Green Gas Limited) ने लखनऊ और आगरा के उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।

हालांकि, कंपनियां अब बकाया बिलों को लेकर सख्त रुख अपना रही हैं। सप्लाई पर बढ़ते दबाव को देखते हुए उन ग्राहकों के कनेक्शन सबसे पहले काटे जा सकते हैं जिनका भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। सरकार ने GAIL (India) Limited को 'पूल्ड प्राइस सिस्टम' संभालने की जिम्मेदारी सौंपी है ताकि जरूरी क्षेत्रों को सस्ती गैस मिलती रहे।

उद्योगों पर गिरेगी गाज: सप्लाई में 20% तक की कटौती

जहाँ एक तरफ आम जनता को राहत दी गई है, वहीं उद्योगों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 'अडानी टोटल गैस लिमिटेड' (Adani Total Gas Limited) सहित कई कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि मिडिल ईस्ट के सप्लायरों ने हाथ खींच लिए हैं। सरकारी आदेश के बाद अब कई उद्योगों को उनकी औसत खपत का केवल 80% हिस्सा ही मिल पाएगा। इस कटौती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक स्तर पर मचे हाहाकार के बावजूद भारत के आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतें प्रभावित न हों।