संजू सैमसन का बड़ा खुलासा जब सब बुरा बोल रहे थे, तब मैंने बनाया अपना एक अलग संसार

Post

 News India Live, Digital Desk : संजू सैमसन के पास हुनर की कोई कमी नहीं है, यह बात उनके आलोचक भी जानते हैं। लेकिन भारतीय टीम में कॉम्पिटिशन इतना तगड़ा है कि संजू को हमेशा 'बलि का बकरा' बनते देखा गया। इस उतार-चढ़ाव भरे सफर ने संजू को मानसिक तौर पर काफी थका दिया था। संजू बताते हैं कि एक समय ऐसा भी आया जब उनके मन में सिर्फ़ यही ख्याल आता था"यार पता नहीं अब दोबारा खेलने को कब मिलेगा!"

जब सोशल मीडिया बन गया सिरदर्द
संजू कहते हैं कि आज के दौर में अगर आप परफॉर्म नहीं करते, तो पूरी दुनिया आपके पीछे पड़ जाती है। लोग मीम्स बनाने लगते हैं और एक्सपर्ट्स आपकी कमियां निकालने लगते हैं। इन सब बातों का सीधा असर किसी भी खिलाड़ी के दिमाग पर पड़ता है। इसी शोर से बचने के लिए संजू ने एक अलग रास्ता निकाला, जिसे वो अपना 'बबल' (एक मानसिक घेरा) कहते हैं।

संजू का वो 'खास बबल' क्या था?
संजू ने खुलासा किया कि उन्होंने जानबूझकर बाहरी दुनिया, खबरों और आलोचनाओं से दूरी बना ली थी। उन्होंने खुद को एक सुरक्षित मानसिक दायरे में रखा जहाँ सिर्फ़ उनकी ट्रेनिंग, उनकी फिटनेस और उनके करीबी लोग थे। उन्होंने यह स्वीकार करना सीख लिया था कि उनके हाथ में सिर्फ़ मेहनत है, सिलेक्शन नहीं। संजू के मुताबिक, अगर वो उस समय इस शोर को सुनते रहते, तो शायद वो कभी दोबारा टीम इंडिया की जर्सी नहीं पहन पाते।

वापसी का लंबा रास्ता
संजू की यह कहानी सिर्फ़ क्रिकेट के बारे में नहीं है, बल्कि 'धीरज' के बारे में है। संजू ने यह महसूस किया कि जब आप दूसरों को खुश करने की कोशिश छोड़ देते हैं और खुद की प्रक्रिया (Process) पर ध्यान देते हैं, तो खेल में सुधार अपने आप होने लगता है। आज जब संजू शतक लगाते हैं या विस्फोटक बैटिंग करते हैं, तो उस मुस्कान के पीछे सालों का वो इंतज़ार और वो 'मानसिक सुरक्षा कवच' है जो उन्होंने अपने लिए बनाया था।

अंत में बस इतना...
संजू सैमसन की यह ईमानदारी हमें सिखाती है कि ज़िंदगी में जब आप चारों तरफ से घिर जाएँ, तो कभी-कभी खुद के लिए एक 'खामोशी का घेरा' बनाना ही सबसे सही होता है। हर सवाल का जवाब मुंह से देना ज़रूरी नहीं, कभी-कभी खामोशी से की गई मेहनत भी सबसे ज़्यादा शोर मचाती है।