Russia's new internet law: सिर्फ़ देखने पर भी लगेगा भारी जुर्माना
News India Live, Digital Desk: डिजिटल युग में इंटरनेट हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है, लेकिन क्या होगा अगर सिर्फ़ कुछ देखने भर से आपको जेल या जुर्माना देना पड़ जाए? रूस ने ऐसा ही एक सख्त कानून लागू किया है जो इंटरनेट यूज़र्स के लिए नई चुनौतियां लेकर आया है। अब अगर आप रूस में प्रतिबंधित सामग्री को सिर्फ़ देखते भर हैं, तो भी आपको जुर्माना चुकाना पड़ सकता है।
यह नया कानून अगले साल 1 सितंबर, 2025 से प्रभावी होगा। इस कानून के तहत, यदि कोई व्यक्ति रूसी संघ में प्रतिबंधित मानी गई सामग्री को ऑनलाइन देखता है, तो उस पर 5,000 रूबल तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह रकम भारतीय रुपयों में लगभग 4,700 रुपये या 65 अमेरिकी डॉलर के बराबर है। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है क्योंकि अब तक ऐसे मामलों में जुर्माना आमतौर पर सामग्री को देखने वालों पर नहीं, बल्कि उसे प्रसारित करने या बनाने वालों पर लगाया जाता था।
इस कानून के दायरे में कई तरह की सामग्री आती है। इसमें आतंकवादी सामग्री, चरमपंथी सामग्री, बाल पोर्नोग्राफी, नशीले पदार्थों के प्रचार से संबंधित जानकारी, और आत्महत्या के लिए उकसाने वाली सामग्री शामिल है। रूस सरकार का कहना है कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य हानिकारक ऑनलाइन सामग्री पर लगाम लगाना और विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को ऐसे गलत प्रभाव से बचाना है। देश के इंटरनेट नियामक निकाय रोसकोमनादज़ोर (Roskomnadzor) को इस कानून को लागू करने और ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखने का अधिकार दिया गया है।
व्यक्तिगत यूज़र्स के अलावा, कंपनियों और संगठनों पर भी इस कानून का असर होगा। यदि कोई कंपनी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ऐसी प्रतिबंधित सामग्री को हटाने में विफल रहता है, तो उन पर 4 मिलियन रूबल (लगभग 3.8 लाख रुपये या 44,000 डॉलर) तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। यह जुर्माना उल्लंघन की गंभीरता और आवृत्ति के आधार पर बढ़ भी सकता है।
हालांकि, रूस सरकार इसे ऑनलाइन सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए ज़रूरी मान रही है, लेकिन दुनिया भर में इस कानून को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं। आलोचकों का मानना है कि यह कानून इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रतिबंधित कर सकता है और सरकार को ऑनलाइन गतिविधियों पर अधिक नियंत्रण रखने की शक्ति प्रदान कर सकता है। कुछ विशेषज्ञ तो इसकी तुलना चीन के 'ग्रेट फ़ायरवॉल' से कर रहे हैं, जो देश के भीतर इंटरनेट पर सख्त निगरानी और सेंसरशिप लागू करता है। यह कानून निश्चित रूप से रूस में इंटरनेट के इस्तेमाल के तरीके को बदलने वाला है और ऑनलाइन स्वतंत्रता को लेकर दुनिया भर में नई बहस छेड़ सकता है।