Russia-Iran Alliance: मिडिल ईस्ट में रूस की 'एंट्री'! क्या पुतिन की खुफिया जानकारी से अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला करेगा ईरान? जानें व्हाइट हाउस का जवाब
तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने ईरान को कुछ ऐसी गुप्त सूचनाएं (Intelligence) साझा की हैं, जो अमेरिकी सेना के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती हैं। सूत्रों का दावा है कि इस जानकारी की मदद से ईरान क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य संपत्तियों को निशाना बना सकता है। रूस और ईरान के बीच बढ़ती यह नजदीकी अमेरिका और इजरायल के लिए नई चुनौती पेश कर रही है।
रूस का 'इंटेलिजेंस' सपोर्ट: क्या है पूरा मामला?
एपी (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी खुफिया जानकारी रखने वाले दो अधिकारियों ने पुष्टि की है कि रूस ने तेहरान को अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों की सटीक लोकेशन या संवेदनशील डेटा मुहैया कराया है।
अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप: विशेषज्ञ इसे रूस द्वारा अमेरिका के खिलाफ एक 'प्रॉक्सी' चाल मान रहे हैं। जहां एक तरफ अमेरिका और इजरायल 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के जरिए ईरान को निशाना बना रहे हैं, वहीं रूस ने खुफिया जानकारी देकर ईरान के पलड़े को भारी करने की कोशिश की है।
क्या रूस निर्देश दे रहा है? हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या रूस इस जानकारी के आधार पर ईरान को हमले के निर्देश भी दे रहा है या यह केवल सूचना साझा करने तक सीमित है।
व्हाइट हाउस का कड़ा रुख: "हम उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर रहे हैं"
रूसी हस्तक्षेप की खबरों के बीच व्हाइट हाउस ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने इन दावों को एक तरह से खारिज करते हुए कहा कि रूस की किसी भी खुफिया जानकारी से अमेरिका के सैन्य अभियानों पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
"ईरान में चल रहे हमारे सैन्य अभियानों पर इससे कोई असर नहीं होगा, क्योंकि हम उनके सैन्य ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त कर रहे हैं।" - कैरोलिन लीविट, प्रेस सचिव
जब उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर व्लादिमीर पुतिन से बात की है, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
क्रेमलिन की सफाई: सैन्य सहायता पर क्या बोले पेस्कोव?
दूसरी तरफ, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रूस की भूमिका को लेकर सधे हुए अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल तेहरान की ओर से किसी भी तरह की सीधी सैन्य सहायता की मांग नहीं की गई है।
निरंतर बातचीत: पेस्कोव ने पुष्टि की कि रूस और ईरानी नेतृत्व के बीच लगातार संवाद जारी है और यह आगे भी बना रहेगा।
ईरान का अलगाव: परमाणु कार्यक्रम और हिज़्बुल्लाह-हमास जैसे समूहों को समर्थन देने के कारण ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय अलगाव झेल रहा है, ऐसे में रूस उसका सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा है।
जंग के मैदान का ताजा अपडेट (मार्च 2026)
ईरान का नुकसान: इजरायली और अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी और एयर डिफेंस सिस्टम का बड़ा हिस्सा तबाह हो चुका है।
ट्रंप का दावा: डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया था कि ईरान की सेना और नेता लगभग खत्म हो चुके हैं और अब केवल 'सरेंडर' ही उनके पास रास्ता है।
संयुक्त राष्ट्र की अपील: यूएन महासचिव गुटेरेस ने दोनों पक्षों से गंभीर बातचीत और शांति की अपील की है ताकि पूरे क्षेत्र को तबाही से बचाया जा सके।