झीरम घाटी से बीजापुर तक 200 जवानों की मौत का बदला पूरा? हिडमा के अंत की अनकही कहानी
News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के बस्तर के जंगलों से एक ऐसी खबर निकलकर आ रही है, जिसने सुरक्षाबलों और नक्सलवाद पर नजर रखने वालों के बीच हलचल मचा दी है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि 50 लाख का इनामी और नक्सलियों का सबसे क्रूर कमांडर कहा जाने वाला माड़वी हिडमा मारा गया है. हालांकि, अभी तक इस खबर की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर यह सच है तो यह देश में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बहुत बड़ी कामयाबी होगी.
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि हिडमा के मारे जाने की यह खबर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद को खत्म करने के लिए दी गई 30 नवंबर की डेडलाइन से ठीक 12 दिन पहले आई है.
कौन था माड़वी हिडमा?
माड़वी हिडमा कोई छोटा-मोटा नक्सली नहीं था. वह सीपीआई (माओवादी) की पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर-1 का कमांडर और नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था. उस पर छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 50 लाख रुपये से ज्यादा का इनाम था. हिडमा को सुरक्षाबलों पर हुए कई बड़े और घातक हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था.
22 जवानों की शहादत का था जिम्मेदार
हिडमा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में 3 अप्रैल 2021 को बीजापुर में हुए भीषण नक्सली हमले के बाद आया था. इस हमले में सुरक्षाबलों के 22 जवान शहीद हो गए थे और 30 से ज्यादा घायल हुए थे. इस हमले की साजिश हिडमा ने ही रची थी. इसके अलावा 2013 के झीरम घाटी हमले में भी उसका नाम सामने आया था, जिसमें कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 27 लोग मारे गए थे. कहा जाता है कि हिडमा 200 से ज्यादा जवानों की शहादत का जिम्मेदार था और उसकी क्रूरता के किस्से बस्तर के जंगलों में आम थे.
कैसे मारा गया हिडमा?
सूत्रों के मुताबिक, तेलंगाना के कोमराम भीम आसिफाबाद जिले में तेलंगाना पुलिस के ग्रेहाउंड कमांडो के साथ हुई एक मुठभेड़ में हिडमा मारा गया है. हालांकि, नक्सलियों या पुलिस की तरफ से अभी तक इस पर कोई बयान नहीं आया है. नक्सली आमतौर पर अपने बड़े कमांडरों की मौत की खबर को छिपाते हैं, इसलिए आधिकारिक पुष्टि में अभी समय लग सकता है.
अगर हिडमा के मारे जाने की खबर सच साबित होती है, तो यह न केवल अमित शाह की डेडलाइन के लिहाज से एक बड़ी सफलता होगी, बल्कि बस्तर में शांति की बहाली और नक्सलवाद की कमर तोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा.