अफगानिस्तान में अंधेरा युग की वापसी तालिबान का नया कानून, महिलाओं को सरेआम कोड़े और पत्थर मारने की मिलेगी कानूनी मंजूरी

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News India Live, Digital Desk : मानवाधिकारों की दुहाई देने वाली दुनिया के लिए अफगानिस्तान से एक दिल दहला देने वाली खबर आई है। तालिबान प्रशासन एक नया 'पीनल कोड' तैयार कर रहा है, जो महिलाओं के खिलाफ मध्ययुगीन बर्बर सजाओं को 'कानूनी जामा' पहना देगा। इस नए कानून के तहत व्यभिचार (Adultery) और अन्य 'नैतिक अपराधों' के लिए महिलाओं को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारना और पत्थर मारकर जान से लेना (Stoning) अब वैध हो जाएगा।

नए कानून की खौफनाक बारीकियां

संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान का यह नया दंड विधान विशेष रूप से महिलाओं की स्वतंत्रता को कुचलने के लिए बनाया गया है। इसमें शामिल कुछ प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:

सरेआम सजा: किसी भी 'अनैतिक' कार्य के लिए महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर सजा दी जाएगी ताकि समाज में डर पैदा किया जा सके।

पत्थर मारना (Stoning): गंभीर आरोपों में महिलाओं को जमीन में गाड़कर तब तक पत्थर मारने का प्रावधान है जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए।

अधिकारों का खात्मा: शिक्षा और काम के अधिकार के बाद अब महिलाओं के 'जीने के अधिकार' पर भी कानूनी पहरा बिठाया जा रहा है।

दुनिया भर में आक्रोश और चिंता

तालिबान के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हड़कंप मचा दिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह 1990 के दशक वाले तालिबानी शासन की वापसी है।

UN की चेतावनी: संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का खुला उल्लंघन है।

महिला कार्यकर्ताओं की गुहार: अफगान महिला कार्यकर्ताओं ने वैश्विक शक्तियों से हस्तक्षेप की मांग की है, उनका कहना है कि "हम अपने ही देश में कैदी बनकर रह गई हैं।"

क्या तालिबान पर लगेगा लगाम?

हालांकि दुनिया के कई देशों ने तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है, लेकिन इस तरह के कानून लागू होने से वहां की महिलाओं के लिए स्थिति 'नर्क' जैसी होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक मंचों पर सख्त आर्थिक और राजनीतिक दबाव नहीं बनाया गया, तो अफगानिस्तान की महिलाएं इतिहास के सबसे काले दौर में धकेल दी जाएंगी।