MBBS में बार-बार फेल, ऊपर से अनुशासन की कमी ,BRD मेडिकल कॉलेज ने दरोगा के बेटे पर लिया अब तक का सबसे बड़ा फैसला

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News India Live, Digital Desk : हर पिता का सपना होता है कि उसका बच्चा समाज में सर ऊंचा करके जिए। खासकर जब पिता खुद पुलिस की वर्दी पहनकर दुनिया को अनुशासन सिखाता हो, तो उसकी उम्मीदें अपने बच्चों से कहीं ज्यादा होती हैं। लेकिन गोरखपुर के बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज से एक ऐसी खबर आई है जिसने शिक्षा और अनुशासन के बीच की बारीक लकीर को लेकर बहस छेड़ दी है।

फेल होने का सिलसिला और टूटता अनुशासन

पूरा मामला बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एक छात्र का है जो काफी समय से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहा है। सिर्फ फेल होना ही बड़ी समस्या नहीं थी, बल्कि कॉलेज प्रशासन की मानें तो छात्र का व्यवहार और अनुशासन भी पटरी से उतर चुका था। कई बार समझाने के बावजूद जब हालात नहीं सुधरे, तो कॉलेज मैनेजमेंट को एक कड़ा फैसला लेना पड़ा।

वर्दी वाले पिता के सामने बेटे की पेशी

इस पूरी घटना का सबसे इमोशनल और चर्चा वाला हिस्सा तब रहा, जब छात्र के पिता को कॉलेज बुलाया गया। छात्र के पिता उत्तर प्रदेश पुलिस में ही सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद पर तैनात हैं। एक तरफ पिता की वर्दी और समाज में उनका रौब, और दूसरी तरफ कॉलेज प्रिंसिपल के दफ्तर में खड़ा उनका वो बेटा, जो न केवल पढ़ाई में पिछड़ रहा था बल्कि अनुशासन भी तोड़ रहा था। यह एक ऐसे पिता की परीक्षा थी जो दुनिया को तो सुधारता है, पर अपने बच्चे को सही राह पर लाने के लिए बेबस नजर आ रहा था।

प्रशासन ने क्यों दिखाई इतनी सख्ती?

मेडिकल कॉलेज ने छात्र पर कड़ी कार्रवाई की है। सूत्रों की मानें तो छात्र के कॉलेज कैंपस और हॉस्टल में प्रवेश से लेकर क्लास अटेंड करने तक पर कुछ सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं। प्रशासन का तर्क सीधा है—'डॉक्टरी एक ज़िम्मेदारी भरा पेशा है।' अगर यहाँ कोई छात्र लापरवाह है और नियमों को नहीं मानता, तो वह कल को मरीजों की जान के साथ भी खिलवाड़ कर सकता है। इसी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत यह पहला बड़ा एक्शन लिया गया है।

बाकी छात्रों के लिए भी कड़ा संदेश

कॉलेज के अन्य फेल हो रहे छात्रों या जो अनुशासन के मामले में ढिलाई बरत रहे हैं, उनके लिए भी यह एक चेतावनी जैसा है। अब कॉलेज सिर्फ हाजिरी या नंबर नहीं देख रहा, बल्कि छात्रों के ओवरऑल बिहेवियर पर भी नजर रख रहा है। बीआरडी प्रशासन ने साफ़ कर दिया है कि अगर भविष्य में किसी ने पढ़ाई में ढिलाई दिखाई या अनुशासन तोड़ा, तो उनके साथ भी ऐसी ही नरमी नहीं बरती जाएगी।

परवरिश और बढ़ते तनाव का मुद्दा

यहाँ एक बड़ा सवाल ये भी खड़ा होता है कि आखिर एक मेधावी छात्र जो इतनी कठिन प्रवेश परीक्षा (NEET) पार करके मेडिकल कॉलेज पहुँचा, वह बीच रास्ते में इस तरह क्यों भटक गया? क्या इसके पीछे पढ़ाई का भारी बोझ है या फिर सोशल मीडिया और गलत संगत का असर? पिता के पुलिस में होने का रौब क्या बच्चे को जिद्दी बना देता है या फिर अपेक्षाओं का बोझ उसे तोड़ देता है?