FATF की ग्रे-लिस्ट से तो निकल गए, पर पाकिस्तान को मिली सख्त चेतावनी
News India Live, Digital Desk: फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे-लिस्ट से बाहर आने के बाद पाकिस्तान में भले ही जश्न का माहौल हो, लेकिन यह राहत शायद लंबे समय तक न टिके। FATF ने साफ-साफ शब्दों में पाकिस्तान को चेताया है कि वो इस फैसले को अपनी 'बुलेटप्रूफ' जीत न समझे और आतंक के लिए होने वाली फंडिंग पर अपनी नजर बनाए रखे।
FATF के अध्यक्ष, टी राजा कुमार ने कहा है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को रोकने के लिए पिछले कुछ सालों में काफी अच्छे कदम उठाए हैं और सुधार किए हैं, जिनकी वजह से उसे ग्रे-लिस्ट से बाहर किया गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब उस पर से खतरा टल गया है।
'सुधार की राह पर चलना होगा'
राजा कुमार ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान को आगे भी सुधारों के रास्ते पर चलते रहना होगा। उन्होंने कहा, "मैं पाकिस्तान से आग्रह करता हूं कि वह एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण (AML/CFT) के खिलाफ अपनी प्रणाली को और मजबूत करने के लिए FATF के साथ मिलकर काम करना जारी रखे।"
इसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि अगर पाकिस्तान ने जरा भी ढील दी या आतंक की फंडिंग से जुड़े मामलों में पुरानी राह पर लौटता दिखा, तो उसे दोबारा इस लिस्ट में डालने में देर नहीं लगाई जाएगी।
क्या है FATF और क्यों डरता है पाकिस्तान?
FATF एक वैश्विक संस्था है जो मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग जैसे मामलों पर अपनी नजर रखती है। जब किसी देश को ग्रे-लिस्ट में डाला जाता है, तो दुनिया भर में उसकी आर्थिक साख कमजोर हो जाती है। उसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे IMF, वर्ल्ड बैंक आदि से कर्ज मिलने में मुश्किल होती है और विदेशी निवेश पर भी बुरा असर पड़ता है।
पाकिस्तान को 2018 में इस लिस्ट में डाला गया था, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा। चार साल की मशक्कत के बाद अब जाकर उसे इससे बाहर निकाला गया है। FATF की यह नई चेतावनी पाकिस्तान के लिए एक संदेश है कि भविष्य में की गई एक भी गलती उसे फिर से उसी मुश्किल में डाल सकती है।