India Budget 2026-27: खनिज क्षेत्र के लिए ₹7,280 करोड़ का मेगा बजट, लिथियम और रेयर अर्थ मिनरल्स पर सरकार का बड़ा दांव

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने India Budget 2026-27 में देश के खनिज और खनन क्षेत्र (Mining Sector) की सूरत बदलने के लिए खजाना खोल दिया है। वित्त मंत्री ने इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए ₹7,280 करोड़ के भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य भारत को खनिज संसाधनों के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और विदेशों से होने वाले महंगे आयात पर लगाम कसना है।

यह बजटीय आवंटन देश में नई खदानों की खोज (Exploration), आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल मैपिंग को नई ऊंचाई पर ले जाएगा, जिससे न केवल औद्योगिक विकास होगा बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के लाखों अवसर भी पैदा होंगे।

इलेक्ट्रिक व्हीकल और ग्रीन एनर्जी को मिलेगी रफ्तार

आज के दौर में स्टील, कोयला, लिथियम और कॉपर जैसे खनिजों की मांग चरम पर है। विशेष रूप से इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए लिथियम और रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) की भूमिका 'गेम-चेंजर' मानी जा रही है।

आत्मनिर्भर भारत: बजट का बड़ा हिस्सा इन महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की पहचान और उनके घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर खर्च किया जाएगा।

तकनीकी सुधार: ₹7,280 करोड़ की इस राशि से खनन में आधुनिक तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly Mining) प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।

निजी निवेश और 'Ease of Doing Business' पर जोर

सरकार केवल पैसा ही नहीं लगा रही, बल्कि इस क्षेत्र में निजी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए बड़े नीतिगत बदलाव (Policy Reforms) भी करने जा रही है।

पारदर्शी नीलामी: खदानों की नीलामी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाया जाएगा।

डिजिटल मैपिंग: देश के खनिज भंडार की सटीक जानकारी के लिए हाई-टेक सर्वे और डिजिटल मैपिंग का सहारा लिया जाएगा।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: खनन क्षेत्र में काम शुरू करने के लिए मिलने वाली मंजूरियों (Clearances) को आसान बनाया जाएगा, ताकि प्रोजेक्ट्स में देरी न हो।

विशेषज्ञों की राय: अर्थव्यवस्था के लिए 'रीढ़' बनेगा यह निवेश

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बजट 2026-27 में खनिज क्षेत्र पर किया गया यह फोकस भारत की औद्योगिक विकास दर को तेज करने में अहम भूमिका निभाएगा। खनिजों का उत्पादन बढ़ने से स्टील और सीमेंट जैसी इंडस्ट्री को कच्चा माल सस्ता मिलेगा, जिसका सीधा लाभ आम आदमी को घर बनाने और बुनियादी ढांचे के विकास के रूप में मिलेगा। कुल मिलाकर, यह कदम भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।