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April 09 2026 10:47 am

याद है वो 'नमस्ते ट्रंप' वाला दौर? अब सब खत्म! मोदी-ट्रंप की दोस्ती पर हुआ सबसे बड़ा खुलासा

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एक दौर था जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती की मिसालें दी जाती थीं। अहमदाबाद में 'नमस्ते ट्रंप' का भव्य आयोजन हो या ह्यूस्टन में 'हाउडी, मोदी!' का मेगा शो... दोनों नेताओं का एक-दूसरे को गले लगाना, तारीफों के पुल बांधना, यह सब देखकर लगता था कि भारत और अमेरिका के रिश्ते एक नए सुनहरे दौर में पहुँच चुके हैं।

लेकिन राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं होती। अब एक ऐसा चौंकाने वाला दावा सामने आया है, जो बताता है कि पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही थी, और अब तो वो दोस्ती "पूरी तरह से खत्म" हो चुकी है।

यह सनसनीखेज दावा किसी और ने नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप के ही पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने किया है।

क्या है जॉन बोल्टन का दावा?

जॉन बोल्टन, जो ट्रंप के कार्यकाल में व्हाइट हाउस के सबसे अहम लोगों में से एक थे, ने दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप अब पीएम मोदी से बुरी तरह खफा हैं और उनके रिश्ते अब पहले जैसे बिल्कुल नहीं रहे।

लेकिन... आखिर दोस्ती टूटी क्यों?

बोल्टन के मुताबिक, इस नाराजगी की सबसे बड़ी वजह 2020 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव है। डोनाल्ड ट्रंप को पूरी उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी गहरी दोस्ती का फायदा उन्हें चुनाव में मिलेगा। उन्हें लगा था कि पीएम मोदी की लोकप्रियता के कारण अमेरिका में बसे लाखों भारतीय-अमेरिकी वोटर उन्हें ही वोट देंगे।

लेकिन हुआ इसके उलट। चुनाव में ज़्यादातर भारतीय-अमेरिकी वोटर्स ने ट्रंप के विरोधी जो बाइडेन का साथ दिया। बोल्टन का कहना है कि इसी बात से ट्रंप को गहरा धक्का लगा। उन्हें लगा कि पीएम मोदी ने उनकी मदद के लिए कुछ नहीं किया और उनकी दोस्ती का कोई फायदा नहीं हुआ। इसी धोखे की भावना के चलते, ट्रंप के मन में मोदी के प्रति कड़वाहट आ गई।

इस दावे का क्या मतलब है?

यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अमेरिका में राष्ट्रपति पद के बड़े दावेदार बनकर उभरे हैं। जॉन बोल्टन का यह दावा कई बड़े सवाल खड़े करता है:

  • क्या दो बड़े नेताओं की दोस्ती सिर्फ दिखावा और राजनीतिक ज़रूरत थी?
  • अगर ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बनते हैं, तो भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते कैसे होंगे?
  • क्या ट्रंप पुराने गिले-शिकवे भुलाकर आगे बढ़ेंगे या इसका असर भारत-अमेरिका के संबंधों पर पड़ेगा?

यह खुलासा हमें याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में व्यक्तिगत रिश्तों से ज़्यादा देशों के हित मायने रखते हैं। जो दोस्ती कभी दोनों देशों के बीच संबंधों का सबसे मजबूत स्तंभ मानी जा रही थी, आज उसी की नींव हिलती हुई नज़र आ रही है।