Religious Tourism : देवी दुर्गा का ऐसा रूप जो कहीं और नहीं ,झारखंड के देवरी मंदिर की इस बात से हिल जाएंगे आप

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News India Live, Digital Desk : Religious Tourism : झारखंड (Jharkhand) के टामाड़ (Tamar) में स्थित प्रसिद्ध देवरी मंदिर (Deori Mandir) आजकल पूरे देश में अपनी ख़ास पहचान बना रहा है. ये मंदिर किसी अजूबे से कम नहीं, क्योंकि यहाँ देवी दुर्गा (Maa Durga) का ऐसा सोलहभुजी (sixteen-armed) स्वरूप विराजमान है, जो आमतौर पर कहीं और देखने को नहीं मिलता. जब शारदीय नवरात्रि (Sharadiya Navratri) का समय आता है, तो यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है, क्योंकि इस मंदिर की अपनी अलग मान्यता और महिमा है.

इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है. माँ दुर्गा के इस अद्भुत 16 हाथों वाले स्वरूप को देखने और उनके दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. कहा जाता है कि यहाँ सच्चे मन से माँगी गई हर मुराद पूरी होती है. नवरात्रि (Navratri) के दौरान तो पूरा इलाक़ा भक्तिमय हो जाता है. कलश स्थापना (Kalash Sthapana) से लेकर अंतिम दिन तक विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान (religious rituals) चलते रहते हैं.

यहाँ की एक और अनोखी परंपरा है 'बलि' (Sacrifice) का विधान. हालांकि इस विषय पर अक्सर बहस होती रहती है, लेकिन देवरी मंदिर में माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए पशु बलि की सदियों पुरानी परंपरा का आज भी पालन किया जाता है. लोग अपनी मान्यताओं और इच्छाओं की पूर्ति के लिए ये बलि चढ़ाते हैं. हालांकि, इसके तौर-तरीकों में आधुनिक समय के हिसाब से कुछ बदलाव भी देखने को मिलते हैं, लेकिन इस परंपरा का आध्यात्मिक महत्व मंदिर के भक्तों के लिए आज भी ख़ास है.

देवरी मंदिर सिर्फ़ पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि यहाँ की परंपराएँ, सोलहभुजी स्वरूप और शांत वातावरण एक अलग ही ऊर्जा से भरा हुआ है. चाहे आप श्रद्धा भाव से आएँ या फिर एक अलग संस्कृति और आध्यात्मिकता को महसूस करने, देवरी मंदिर आपको एक अनूठा अनुभव ज़रूर देगा.