छत पर गमले रखने से पहले जान लें ये वास्तु नियम, अनजाने में की गई ये बड़ी गलतियां ला सकती हैं आर्थिक तंगी और तनाव

छत पर गमले रखने से पहले जान लें ये वास्तु नियम, अनजाने में की गई ये बड़ी गलतियां ला सकती हैं आर्थिक तंगी और तनाव

आजकल शहरों में जगह की कमी और गार्डनिंग के बढ़ते शौक के कारण अधिकांश लोग अपने घर की छत (टेरेस) पर तरह-तरह के पेड़-पौधे और गमले रख देते हैं। हरियाली आंखों को सुकून देती है और पर्यावरण को शुद्ध बनाती है, लेकिन वास्तु शास्त्र के नियमों की अनदेखी करने पर यही शौक घर-परिवार के लिए भारी परेशानियों की वजह बन सकता है। कई बार लोग बिना सोचे-समझे छत के किसी भी कोने में भारी गमले रख देते हैं या ऐसे पौधे लगा लेते हैं जो नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं। वास्तु शास्त्र में छत को घर का सुरक्षा चक्र और खुला आकाश तत्व माना गया है। यदि इस स्थान पर वास्तु नियमों के विरुद्ध पेड़-पौधों का भारी जमावड़ा कर दिया जाए, तो यह घर के मुख्य कमाने वाले सदस्य की तरक्की, स्वास्थ्य और धन-संपत्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

छत पर गलत तरीके से गमले रखना क्यों माना जाता है वास्तु दोष?

वास्तु विज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार घर की छत का संबंध सीधे तौर पर सकारात्मक ऊर्जा के संचार और ग्रहों की स्थिति से होता है। जब छत पर बेतरतीब ढंग से भारी मिट्टी के गमले, सीमेंट के बड़े पॉट्स या घने पेड़ रख दिए जाते हैं, तो छत पर अत्यधिक भार (Weight) बढ़ जाता है। वास्तु में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) और पूर्व दिशा को हमेशा हल्का, खुला और साफ-सुथरा रखने का विधान है क्योंकि यहीं से दैवीय ऊर्जा और सकारात्मक तरंगें घर में प्रवेश करती हैं। यदि कोई व्यक्ति उत्तर या पूर्व दिशा की छत पर भारी गमलों की कतार लगा देता है, तो उस घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है। इससे गृहस्वामी को लगातार आर्थिक संकट, व्यापार में घाटा और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।

छत पर गीलापन और सीलन: राहु-केतु और शनि का अशुभ प्रभाव

छत पर बागवानी करने का सबसे बड़ा व्यावहारिक और वास्तु दोष सीलन (Dampness) के रूप में सामने आता है। गमलों में रोजाना पानी देने से गमले के नीचे फर्श पर लगातार नमी बनी रहती है। कई बार ड्रेनेज सही न होने पर काई जम जाती है या पानी रिसकर नीचे कमरों की छतों तक पहुंचने लगता है। वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में घर की छत को शनि और राहु से जोड़कर देखा जाता है। छत पर जमा होने वाली गंदगी, कचरा, सूखी पत्तियां और सीलन राहु दोष को सक्रिय कर देती हैं। ऐसा होने पर घर के सदस्यों के बीच अकारण वाद-विवाद, कानूनी पचड़े, अनिद्रा, अचानक धन हानि और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ने लगती हैं।

छत पर भूलकर भी न रखें ये पौधे: बढ़ता है तनाव और क्लेश

वास्तु शास्त्र में पौधों के प्रकार को लेकर बहुत कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं। कुछ पौधे ऐसे होते हैं जिन्हें छत पर रखना सीधे तौर पर वास्तु दोष को न्योता देना माना जाता है:

कैक्टस और कांटेदार पौधे: गुलाब को छोड़कर किसी भी प्रकार का कांटेदार पौधा (जैसे कैक्टस या थूहर) घर की छत पर बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। कांटेदार पौधे नकारात्मक ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक और रिश्तों में खटास आती है।

दूध वाले पौधे: जिन पौधों की टहनियां या पत्ते तोड़ने पर सफेद गाढ़ा दूध जैसा द्रव निकलता है, उन्हें छत पर लगाने से धन का अपव्यय होता है और आर्थिक स्थिरता डगमगा जाती है।

बोनसाई के पौधे: दिखने में बेहद आकर्षक लगने वाले बोनसाई पौधे असल में विकास को कृत्रिम रूप से रोककर तैयार किए जाते हैं। वास्तु के अनुसार घर की छत पर बोनसाई रखने से परिवार के बच्चों और कारोबार की प्रगति अवरुद्ध हो जाती है।

पीपल और बरगद का स्वतः उगना: अक्सर पक्षियों के जरिए छत की दीवारों या कोनों में पीपल या बरगद के पौधे उग आते हैं। वास्तु में इन्हें कभी भी बढ़ने नहीं देना चाहिए। इन्हें पूरी श्रद्धा के साथ जड़ सहित निकालकर किसी मंदिर के पास या खुली जमीन में पुनर्स्थापित कर देना चाहिए।

छत पर गमले रखने की सही दिशा और वास्तु के अचूक नियम

अगर आप गार्डनिंग के शौकीन हैं और छत पर पौधे रखना ही चाहते हैं, तो वास्तु शास्त्र के कुछ नियमों का पालन करके नकारात्मक प्रभावों से पूरी तरह बच सकते हैं।

सबसे पहले दिशा का ध्यान रखें। यदि आपके पास भारी पौधे, बड़े पेड़ या बड़े सीमेंट के गमले हैं, तो उन्हें हमेशा छत के दक्षिण (South), पश्चिम (West) या नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में ही रखें। वास्तु में यह दिशा भारी और ऊंची रखने का नियम है, इसलिए यहां वजन बढ़ाने से घर में स्थिरता और सुरक्षा की भावना मजबूत होती है।

उत्तर और पूर्व दिशा की छत को जितना हो सके खाली और हल्का रखें। यदि इन दिशाओं में पौधे रखने ही हों, तो केवल छोटे गमलों में तुलसी, पुदीना, हरी दूब या हल्के मौसमी फूलों के पौधे ही लगाएं जिनकी ऊंचाई कम हो।

गमलों को सीधे छत के फर्श पर टिकाकर रखने के बजाय हमेशा लोहे या कंक्रीट के स्टैंड्स (Planter Stands) पर रखें। स्टैंड का इस्तेमाल करने से गमलों के नीचे हवा का प्रवाह बना रहता है, फर्श पर पानी नहीं ठहरता और सीलन व काई की समस्या से शत-प्रतिशत छुटकारा मिल जाता है। छत की नियमित सफाई करें और गमलों में गिरी सूखी पत्तियों और कचरे को तुरंत हटाएं।

प्रकृति और हरियाली हमेशा शुभता का प्रतीक होती है, बशर्ते उसे सही संतुलन, स्वच्छता और वास्तु सम्मत दिशा में संजोया जाए। सही नियमों के साथ छत पर की गई गार्डनिंग सकारात्मक ऊर्जा को कई गुना बढ़ा सकती है।