आज का पंचांग 9 अक्टूबर 2026: चतुर्दशी श्राद्ध और मां लक्ष्मी की पूजा का पावन संयोग, जानें कुतुप-रौहिण समय, राहुकाल
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के साथ आज 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और विशेष फलदायी माना जा रहा है। पितृपक्ष के अंतिम पड़ाव में आज चतुर्दशी श्राद्ध का विधान है, जिसे लोक परंपरा और शास्त्रों में 'घट चतुर्दशी' अथवा 'घायल चतुर्दशी' के नाम से भी जाना जाता है। इसके साथ ही शुक्रवार का दिन होने के कारण आज धन, वैभव और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी की विशेष आराधना का दुर्लभ संयोग भी बना हुआ है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार यदि आज के दिन पूर्वजों के निमित्त शास्त्रोक्त विधि से तर्पण और पिंडदान किया जाए, तो अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पितरों को शांति मिलती है और परिवार पर आने वाले कई संकट टल जाते हैं।
चतुर्दशी श्राद्ध का विशेष महत्व: अकाल मृत्यु और दुर्घटना में दिवंगत पितरों का तर्पण
शास्त्रों के अनुसार आश्विन कृष्ण चतुर्दशी का श्राद्ध सामान्य श्राद्ध तिथियों से काफी अलग और अत्यंत संवेदनशील माना गया है। यह तिथि विशेष रूप से परिवार के उन पूर्वजों के तर्पण और मोक्ष के लिए समर्पित होती है जिनकी मृत्यु किसी आकस्मिक दुर्घटना, अस्त्र-शस्त्र के आघात, विषपान, जल में डूबने, सर्पदंश, अग्निदाह या किसी भी प्रकार की अपमृत्यु अथवा आत्महत्या के कारण हुई हो। मान्यता है कि ऐसे पितरों की आत्मा तृप्ति के लिए चाहे उनकी मृत्यु किसी भी अन्य तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध कर्म इसी चतुर्दशी तिथि पर ही किया जाता है। आज के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने, पंचबलि कर्म (गाय, कुत्ता, कौआ, देवादि और चींटी को ग्रास देने) और जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में सुख-शांति का वातावरण स्थापित होता है।
शुक्रवार को मां लक्ष्मी की आराधना और शाम को मुख्य द्वार पर दीपदान का फल
आज शुक्रवार होने के कारण पितरों के स्मरण के साथ-साथ गृह लक्ष्मी और धन की देवी महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का भी उत्तम अवसर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को लाल या श्वेत पुष्प, खीर, मखाना और बताशे अर्पित करने से आर्थिक तंगी, कर्ज और दरिद्रता का नाश होता है। संध्याकाल यानी गोधूलि वेला के समय घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर गाय के शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मां लक्ष्मी का स्थाई निवास बनता है। इस दिन परिवार में किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से बचना चाहिए और घर की स्त्रियों का आदर-सम्मान करना चाहिए, जिससे मां लक्ष्मी की अनुकंपा बनी रहती है।
चतुर्दशी श्राद्ध कर्म के लिए आज के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल
पितरों के तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन के लिए दिन का मध्य भाग यानी दोपहर का समय सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। आज चतुर्दशी श्राद्ध संपन्न करने के लिए पंचांग अनुसार तीन प्रमुख और अत्यंत फलदायी मुहूर्त निर्धारित हैं। पहला 'कुतुप मुहूर्त' सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा, जो श्राद्ध कर्म आरंभ करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इसके पश्चात 'रौहिण मुहूर्त' दोपहर 12:17 बजे से दोपहर 01:04 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन दोनों मुहूर्तों के उपरांत 'अपराह्न काल' दोपहर 01:04 बजे से दोपहर 03:24 बजे तक रहेगा, जिसके दौरान श्राद्ध की सभी आवश्यक रीतियां, तर्पण और पिंड विसर्जन संपन्न किए जा सकते हैं।
ग्रह स्थिति, पंचांग विवरण और सूर्य-चंद्रमा का समय
आज 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार का दिन शक संवत् 1948 (सौर आश्विन 17) और विक्रम संवत् 2083 के अंतर्गत आता है। आश्विन कृष्ण चतुर्दशी तिथि आज रात्रि 09:35 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके उपरांत सर्वपितृ अमावस्या तिथि का प्रारंभ हो जाएगा। दिनभर चंद्रमा कन्या राशि में संचरण करेगा, जबकि सूर्य दक्षिणायन होकर शरद ऋतु के प्रभाव को बढ़ा रहा है। सूर्योदय सुबह 06:02 बजे और सूर्यास्त शाम 05:48 बजे होगा। वहीं चंद्रोदय का समय सुबह 04:36 बजे और चंद्रास्त शाम 04:51 बजे रहेगा। आज प्रातः काल 09:57 बजे तक विष्टि यानी भद्रा करण रहेगा, जिसके उपरांत शुभ कार्य संपादित किए जा सकते हैं।
आज के दिन के प्रमुख शुभ योग और लाभकारी चौघड़िया मुहूर्त
किसी भी नवीन कार्य, अनुष्ठान या यात्रा की योजना बनाने के लिए आज कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04:42 बजे से 05:30 बजे तक रहा, जबकि मध्याह्न काल में सबसे शक्तिशाली माना जाने वाला अभिजित मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त विजय मुहूर्त दोपहर 02:05 बजे से 02:51 बजे तक, अमृत काल दोपहर 02:07 बजे से 03:43 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 05:58 बजे से 06:23 बजे तक फलदायी रहेगा। दिन के शुभ चौघड़िया की बात करें तो लाभ (उन्नति) चौघड़िया सुबह 07:46 बजे से 09:13 बजे तक, अमृत (सर्वोत्तम) चौघड़िया सुबह 09:13 बजे से 10:41 बजे तक और शुभ चौघड़िया दोपहर 12:07 बजे से 01:33 बजे तक विद्यमान रहेगा।
अशुभ समय का रखें ध्यान: राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
शुभ कार्यों और नई शुरुआत के दौरान अशुभ मुहूर्तों का त्याग करना शास्त्र सम्मत माना गया है। आज का राहुकाल प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा, इस समयावधि में कोई भी नया कार्य, खरीदारी या अनुबंध करने से बचना चाहिए। इसी प्रकार यमगंड दोपहर 03:03 बजे से शाम 04:30 बजे तक रहेगा और गुलिक काल सुबह 07:45 बजे से 09:13 बजे तक प्रभावी रहेगा। भद्रा की स्थिति प्रातः 09:57 बजे तक समाप्त हो जाएगी, इसलिए भद्रा समाप्ति के उपरांत ही महत्वपूर्ण धार्मिक और मांगलिक संकल्प लेना श्रेयस्कर रहेगा।