धन-ऐश्वर्य आकर्षित करने वाली कछुए की अंगूठी पहनने के नियम, दिशा और सही तरीका

धन-ऐश्वर्य आकर्षित करने वाली कछुए की अंगूठी पहनने के नियम, दिशा और सही तरीका

सनातन धर्म, फेंगशुई और वास्तु शास्त्र में कछुए को बहुत ही शुभ, पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कछुआ भगवान विष्णु का कच्छप अवतार है, जो समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुए थे। यही वजह है कि आजकल लोगों के बीच कछुए के आकार वाली यानी 'टॉरटॉइज रिंग' (Tortoise Ring) पहनने का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। बाजार में आपको चांदी, सोने या अन्य धातुओं से बनी कछुए की ये डिजाइनर अंगूठियां आसानी से मिल जाएंगी। बहुत से लोग इसे सिर्फ एक बेहतरीन फैशन या ट्रेंड के रूप में पहनते हैं, तो वहीं अधिकांश लोग इसे धन, समृद्धि और गुड लक को आकर्षित करने के लिए धारण करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फेंगशुई और ज्योतिष के नियमों के अनुसार किसी भी चीज को पहनने का एक निश्चित विधान होता है? यदि आप गलत तरीके से कछुए की अंगूठी पहनते हैं, तो आपको फायदे की जगह भारी नुकसान या अशुभ परिणाम भी झेलने पड़ सकते हैं। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि कछुए वाली अंगूठी पहनने के सटीक नियम, सही दिशा और इससे मिलने वाले चमत्कारी फायदों के बारे में।

फेंगशुई और वास्तु में कछुए की अंगूठी का महत्व

वास्तु शास्त्र और फेंगशुई दोनों में ही कछुए को दीर्घायु, स्थिरता, धैर्य और अथाह धन का प्रतीक माना गया है। जिस प्रकार कछुआ अपनी चाल से धीरे-धीरे लेकिन लगातार आगे बढ़ता है और कठिन परिस्थितियों में अपने कवच के जरिए अपनी रक्षा करता है, ठीक उसी तरह यह अंगूठी पहनने वाले के जीवन में स्थिरता लाती है। मान्यता है कि कछुए की अंगूठी पहनने से आर्थिक तंगी दूर होती है और माता लक्ष्मी की कृपा से घर में धन का आगमन तेजी से होने लगता है। यह आपके जीवन से मानसिक तनाव को कम करके सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को तेज करती है। फेंगशुई के जानकारों का मानना है कि यह मेटल की रिंग व्यक्ति के ऑरा (Aura) को मजबूत बनाती है और बुरी नजर या नकारात्मक शक्तियों से उसकी रक्षा करती है। जिन लोगों के बनते हुए काम रुक जाते हैं या जिन्हें बिजनेस में लगातार घाटे का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए यह अंगूठी एक अचूक उपाय साबित हो सकती है।

किस उंगली और हाथ में पहननी चाहिए कछुए की अंगूठी

कछुए वाली अंगूठी को पहनते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि इसे किस हाथ और किस उंगली में पहना जा रहा है। आमतौर पर ज्योतिष और वास्तु नियमों के अनुसार इस अंगूठी को अपने दाहिने हाथ (Right Hand) यानी कार्य करने वाले हाथ की मध्यम उंगली (Middle Finger) में पहनना सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा कुछ लोग इसे अपनी अनामिका उंगली यानी रिंग फिंगर (Ring Finger) या तर्जनी उंगली (Index Finger) में भी पहनते हैं। महिलाओं के लिए बाएं हाथ की मध्यम उंगली में भी इसे धारण करना शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि आप जिस भी उंगली में इस अंगूठी को पहनें, उसकी बनावट ऐसी होनी चाहिए कि कछुए का मुंह हमेशा आपकी यानी पहनने वाले की शरीर की दिशा की तरफ होना चाहिए। अगर कछुए का मुंह बाहर की ओर होगा, तो आपके पास आने वाला धन टिक नहीं पाएगा और धन का आगमन रुक जाएगा।

अंगूठी पहनने का सबसे सही दिन और धातु का चयन

किसी भी रत्न या धातु से जुड़े आभूषण को यदि उसके तयशुदा वार और विधि-विधान के साथ धारण किया जाए, तो उसका शत-प्रतिशत सकारात्मक फल प्राप्त होता है। कछुए की अंगूठी हमेशा चांदी (Silver) धातु की बनवानी सबसे ज्यादा शुभ मानी जाती है, क्योंकि चांदी का संबंध शुक्र और चंद्रमा से होता है जो शीतलता और वैभव प्रदान करते हैं। कुछ लोग अपनी आर्थिक स्थिति और पसंद के अनुसार सोने या तांबे की कछुए वाली अंगूठी भी बनवाते हैं। इस अंगूठी को पहनने के लिए शुक्रवार का दिन सबसे श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इसके अलावा आप इसे शुक्ल पक्ष के किसी भी शुभ सोमवार या गुरुवार के दिन भी सूर्योदय के बाद धारण कर सकते हैं।

अंगूठी धारण करने से पहले करें यह जरूरी शुद्धिकरण

बाजार से कछुए वाली अंगूठी खरीदकर लाने के बाद सीधे उसे अपनी उंगली में बिल्कुल न पहनें। इसे पहनने से पहले इसकी प्राण-प्रतिष्ठा और शुद्धिकरण करना बेहद आवश्यक होता है। अंगूठी को घर लाने के बाद सबसे पहले उसे कच्चे दूध, गंगाजल और साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इसे अपने घर के पूजा घर में माता लक्ष्मी या भगवान विष्णु के चरणों के पास एक साफ लाल या पीले रंग के कपड़े पर रख दें। धूप-दीप दिखाकर विधि-विधान से पूजा करें और माता लक्ष्मी के बीज मंत्र 'ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः' या भगवान विष्णु के मंत्र का कम से कम एक माला जाप करें। इसके बाद ही भगवान से प्रार्थना करके अपने दाहिने हाथ की मध्यम उंगली में इसे धारण करें।

कछुए की अंगूठी पहनते समय इन बातों का रखें विशेष ख्याल

कछुए की अंगूठी पहनने के बाद कुछ जरूरी नियमों का आजीवन पालन करना पड़ता है, अन्यथा इसके नकारात्मक परिणाम भी मिल सकते हैं। सबसे पहली और अहम बात यह है कि एक बार अंगूठी पहनने के बाद बार-बार या रोजाना उसकी दिशा को अपनी उंगली में घुमाएं नहीं। अंगूठी का मुख हमेशा आपकी तरफ ही रहना चाहिए। यदि आप दिशा बदल देते हैं, तो इसका प्रभाव उल्टा हो सकता है। इसके अलावा, जब भी आप नॉनवेज या मदिरा का सेवन करें या किसी सूतक काल में जाएं, तो उससे पहले इस अंगूठी को उतारकर सुरक्षित जगह पर रख दें और शुद्धि के बाद ही दोबारा पहनें। सोते समय या स्नान करते वक्त इसे पहना जा सकता है, लेकिन यदि आप चाहें तो रात में सोते समय इसे उतारकर मंदिर में भी रख सकते हैं।

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