बुध का तुला राशि में महागोचर: लक्ष्मी नारायण योग से मेष, मिथुन और तुला समेत 6 राशियों की बदलेगी किस्मत, कारोबार में बंपर लाभ
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजकुमार कहे जाने वाले बुध देव 26 सितंबर 2026 को अपनी मित्र राशि तुला में विधिवत प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार, नवग्रहों में बुध ग्रह को मानव मस्तिष्क की तार्किक क्षमता, बौद्धिक चातुर्य, अभिव्यक्ति, संवाद कौशल, वित्तीय प्रबंधन और वाणिज्यिक व्यापार का नैसर्गिक कारक ग्रह माना गया है। वहीं दूसरी ओर, तुला राशि वायु तत्व की राशि है जो जीवन में संतुलन, साझेदारी, कूटनीति, सौंदर्य और निष्पक्ष न्याय का प्रतिनिधित्व करती है। जब संचार और व्यवसाय के स्वामी बुध संतुलन की परिचायक तुला राशि में विराजमान होते हैं, तो यह खगोलीय स्थिति सीधे तौर पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी, कॉरपोरेट सौदों, द्विपक्षीय समझौतों और व्यक्तिगत जनसंपर्क कौशल को एक नई ऊंचाई प्रदान करती है। ज्योतिषाचार्य आनंद सागर पाठक के अनुसार, इस गोचर का प्रभाव देश-दुनिया के आर्थिक तंत्र के साथ-साथ सभी बारह राशियों के जातकों की कार्यशैली पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देगा।
तुला में बुध-शुक्र की युति: 'लक्ष्मी नारायण योग' से चमकेगा भाग्य
इस गोचर की सबसे महत्वपूर्ण और दुर्लभ विशेषता यह है कि तुला राशि में पहले से ही धन, वैभव, ऐश्वर्य, कला और रोमांस के अधिपति दैत्यगुरु शुक्र देव स्वराशि में स्थित हैं। 26 सितंबर को जैसे ही बुध देव तुला राशि में कदम रखेंगे, वहां बुध और शुक्र की एक युति स्थापित हो जाएगी, जिसे वैदिक ज्योतिष में 'लक्ष्मी नारायण राजयोग' की संज्ञा दी गई है। यह शुभ संयोग विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा जो मीडिया, जनसंचार, फैशन, अभिनय, इंटीरियर डिजाइनिंग, कलात्मक क्षेत्र, वित्तीय सलाहकार, बैंकिंग और विदेशी व्यापार से सीधे जुड़े हुए हैं। इस युति के प्रभाव से बाजार में नए व्यावसायिक संबंध स्थापित होंगे, लंबे समय से रुके हुए भुगतान प्राप्त होंगे और साझेदारी के व्यापार में अभूतपूर्व विश्वास और समृद्धि देखने को मिलेगी।
मेष और मिथुन: सातवें और पांचवें भाव में बुध लाएंगे नए अवसर
मेष राशि के जातकों के लिए बुध देव का यह गोचर उनके जन्मकुंडली के सातवें भाव यानी दांपत्य जीवन, दैनिक रोजगार और व्यापारिक साझेदारियों के क्षेत्र में घटित हो रहा है। इसके प्रभाव से मेष राशि के व्यापारियों के लिए नए व्यावसायिक अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने और बाजार में अपनी साख बढ़ाने का यह सबसे उपयुक्त समय सिद्ध होगा। आपकी मधुर वाणी और प्रभावी प्रस्तुति से नए निवेशक और ग्राहक आकर्षित होंगे। पुरानी व्यावसायिक समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए निकल जाएगा। इस अवधि में शुभता बढ़ाने के लिए प्रत्येक बुधवार को भगवान श्रीगणेश को 21 दूर्वा दल अर्पित करना लाभकारी रहेगा। वहीं मिथुन राशि के जातकों के लिए बुध स्वयं उनके राशि स्वामी हैं। बुध देव का गोचर मिथुन राशि के पांचवें भाव में हो रहा है, जो उच्च शिक्षा, तीव्र बुद्धि, रचनात्मक सोच और संतान का भाव माना जाता है। लेखन, विज्ञापन, डिजिटल मार्केटिंग, कोडिंग और शोध कार्य से जुड़े मिथुन राशि के लोगों के मस्तिष्क में क्रांतिकारी नए आइडियाज आएंगे जो उन्हें कार्यक्षेत्र में भारी प्रतिष्ठा और आर्थिक लाभ दिलाएंगे। छात्रों के लिए एकाग्रता में वृद्धि होगी। उपाय स्वरूप नियमित रूप से विघ्नहर्ता गणेश जी की विधिवत पूजा-अर्चना करें।
सिंह और तुला: संवाद कौशल में निखार और व्यक्तित्व का जबरदस्त विस्तार
सिंह राशि के जातकों के लिए बुध देव तीसरे भाव में गोचर करने जा रहे हैं, जो पराक्रम, साहस, छोटे भाई-बहनों और संपर्क सूत्रों का स्थान है। इस गोचर के चलते सिंह राशि के लोगों के भीतर झिझक समाप्त होगी और वे अपनी योजनाओं को पूरे आत्मविश्वास के साथ समाज व उच्चाधिकारियों के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे। सेल्स, पब्लिक रिलेशंस, मीडिया, कंटेंट राइटिंग और पत्रकारिता से जुड़े जातकों को अचानक कोई बड़ा प्रोजेक्ट या पदोन्नति का प्रस्ताव मिल सकता है। यात्राओं से भी धन लाभ के योग बनेंगे। सिंह राशि वालों को बुधवार के दिन भगवान गणेश को हरी मूंग की दाल अर्पित करनी चाहिए। बात करें तुला राशि की, तो बुध देव का गोचर सीधे तुला राशि के लग्न यानी प्रथम भाव में हो रहा है। लग्न में बुध और स्वग्रही शुक्र की उपस्थिति तुला राशि के जातकों के व्यक्तित्व में गजब का आकर्षण और सम्मोहन पैदा कर देगी। सही समय पर सही निर्णय लेने की आपकी अंतःप्रेरणा बहुत मजबूत होगी। जो लोग नया स्टार्टअप, बुटीक या कंसल्टेंसी फर्म शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय मील का पत्थर साबित होगा। उपाय के तौर पर प्रत्येक बुधवार भगवान गणेश को दूर्वा की माला चढ़ाएं।
धनु और मकर: ग्यारहवें और दसवें भाव में खुलेंगे धन व करियर के बंद रास्ते
धनु राशि के जातकों की कुंडली में बुध देव ग्यारहवें भाव यानी एकादश भाव में गोचर करेंगे, जिसे ज्योतिष में आय, लाभ और अभीष्ट सिद्धियों का घर कहा जाता है। एकादश भाव में बुध का आना यह संकेत देता है कि धनु राशि के लोगों की दैनिक और मासिक आमदनी के स्रोतों में एकाएक इजाफा होगा। यदि आपका कोई बड़ा भुगतान, ऋण या अचल संपत्ति से जुड़ा विवाद काफी समय से लंबित था, तो वह अब सुलझ जाएगा। प्रभावशाली लोगों से हुई मुलाकातें भविष्य में बड़े आर्थिक अनुबंधों में तब्दील होंगी। कारोबार में पुराने ग्राहकों के साथ-साथ बड़े कॉर्पोरेट क्लाइंट्स जुड़ेंगे। धनु राशि के जातक बुधवार को गणेश जी को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। अंत में, मकर राशि के जातकों के लिए बुध देव का गोचर दसवें भाव यानी कर्म और करियर के क्षेत्र में होने जा रहा है। दसवें भाव में बुध की स्थिति मकर राशि के नौकरीपेशा जातकों को कार्यक्षेत्र में जबरदस्त अधिकार और सम्मान दिलाएगी। वरिष्ठ अधिकारी और प्रबंधन आपके सुझावों का सम्मान करेंगे। कार्यस्थल पर कोई नई परियोजना या उच्च पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। व्यापारियों को अपनी योजनाओं का व्यवस्थित क्रियान्वयन करने से बड़ा मुनाफा प्राप्त होगा। उपाय के रूप में किसी निर्धन मेधावी विद्यार्थी को पुस्तकें, कॉपियां या हरी कलम भेंट करें।