Navratna PSU का L&T को ₹797 करोड़ का मेगा ऑर्डर! 36 महीनों में थाल अमोनिया प्लांट का होगा कायाकल्प, शेयरों में हलचल तेज

Navratna PSU का L&T को ₹797 करोड़ का मेगा ऑर्डर! 36 महीनों में थाल अमोनिया प्लांट का होगा कायाकल्प, शेयरों में हलचल तेज

भारतीय शेयर बाजार और इंफ्रास्ट्रक्चर-केमिकल सेक्टर के लिए एक बड़ी कॉर्पोरेट खबर सामने आई है। प्रमुख नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (Navratna PSU) 'राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड' (RCF) ने देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन दिग्गज 'लार्सन एंड टुब्रो' (L&T) को एक विशाल कॉन्ट्रैक्ट सौंपा है। आरसीएफ ने अपने महाराष्ट्र स्थित प्रतिष्ठित थाल अमोनिया प्लांट के आधुनिकीकरण और पुनरुद्धार (Revamp) के लिए एलएंडटी को ₹797.10 करोड़ (टैक्स सहित) का औपचारिक वर्क ऑर्डर जारी किया है। यह मेगा प्रोजेक्ट अगले 36 महीनों यानी तीन वर्षों की तय समयसीमा में पूरा किया जाना है। इस रणनीतिक साझेदारी से जहां देश में यूरिया और अमोनिया उत्पादन की ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी, वहीं दलाल स्ट्रीट पर दोनों कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की सक्रियता तेजी से बढ़ गई है।

क्या है ₹797 करोड़ का प्रोजेक्ट और L&T का कार्यक्षेत्र?

आरसीएफ द्वारा स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह ऑर्डर इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन और कमीशनिंग यानी पूर्ण ईपीसी (EPC) आधार पर दिया गया है।

इस प्रोजेक्ट के तहत एलएंडटी के एनर्जी हाइड्रोकार्बन डिवीजन को थाल (रायगढ़, महाराष्ट्र) स्थित अमोनिया निर्माण सुविधा के बेसिक इंजीनियरिंग डिजाइन, प्रोक्योरमेंट, फैब्रिकेशन, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और फाइनल कमीशनिंग की संपूर्ण जिम्मेदारी निभानी होगी। यह टर्नकी प्रोजेक्ट प्लांट के उत्पादन चक्र को अत्याधुनिक तकनीक पर अपग्रेड करने, उत्सर्जन मानकों को नियंत्रित करने और ऊर्जा की प्रति टन खपत को घटाने के लिए डिजाइन किया गया है।

36 महीनों में थाल अमोनिया प्लांट के रिवैम्प का क्या होगा असर?

थाल फर्टिलाइजर कॉम्प्लेक्स भारत के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण उर्वरक संयंत्रों में गिना जाता है, जहां से देश के कृषि क्षेत्र को भारी मात्रा में यूरिया और औद्योगिक अमोनिया की आपूर्ति की जाती है। इस मेगा रिवैम्प के 3 मुख्य फायदे होंगे:

  • ऊर्जा दक्षता और लागत में कमी: पुराने कंप्रेसर, रिफॉर्मर और हीट रिकवरी सिस्टम को बदलकर नई पीढ़ी की तकनीक लगाई जाएगी। इससे प्रति मीट्रिक टन अमोनिया उत्पादन में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) की खपत काफी कम होगी।

  • उत्पादन क्षमता में स्थिरता: प्लांट की कार्यक्षमता बढ़ने से डाउनटाइम और अनपेक्षित शटडाउन की घटनाएं न के बराबर रह जाएंगी, जिससे देश में घरेलू उर्वरक आपूर्ति निर्बाध बनी रहेगी।

  • कार्बन फुटप्रिंट और पर्यावरण संरक्षण: नए सिस्टम के लागू होने से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भारी गिरावट आएगी, जिससे आरसीएफ को वैश्विक सस्टेनेबिलिटी और कड़े ईएसजी (ESG) मानकों पर खरा उतरने में मदद मिलेगी।

ऑर्डर बुक और शेयरों पर दोनों कंपनियों के लिए क्या हैं मायने?

  • लार्सन एंड टुब्रो (L&T): वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान एलएंडटी की हाइड्रोकार्बन और एनर्जी ऑर्डर बुक लगातार मजबूत बनी हुई है। घरेलू फर्टिलाइजर सेक्टर में मिला यह 797 करोड़ रुपये का ठेका कंपनी की कोर ईपीसी क्षमता और कड़े समय में बड़े इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स डिलीवर करने के ट्रैक रिकॉर्ड को और मजबूत करता है।

  • राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF): नवरत्न दर्जे के तहत आरसीएफ को अपनी पूंजीगत योजनाओं (Capex Plans) पर स्वतंत्र फैसले लेने की छूट मिली हुई है। थाल प्लांट के आधुनिकीकरण पर किया जा रहा यह पूंजीगत खर्च कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन (EBITDA Margin) को आने वाले वर्षों में सुधारने का काम करेगा, जो लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है।

सरकारी नीतियों और उर्वरक आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

केंद्र सरकार देश को रासायनिक खादों और विशेष रूप से यूरिया उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मिशन मोड पर काम कर रही है। गैस आधारित आधुनिक अमोनिया प्लांट्स का विस्तार होने से भारत की आयातित उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी और सरकार के सब्सिडी बिल पर पड़ने वाला भारी वित्तीय बोझ भी कम होगा। आरसीएफ और एलएंडटी के बीच हुआ यह करार 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करने वाला एक अहम कदम है।