घर में सीढ़ियां किस दिशा में होनी चाहिए? गलत दिशा या एंटी-क्लॉकवाइज बनी सीढ़ियों के वास्तु दोष दूर करने के 2 अचूक उपाय
सनातन संस्कृति और प्राचीन वास्तु शास्त्र में हमारे घर के निर्माण से जुड़ी हर एक चीज का हमारे जीवन, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जब बात मल्टी-स्टोरी घरों या दो मंजिला मकानों की आती है, तो सीढ़ियों (Staircase) का स्थान और उनकी बनावट सबसे महत्वपूर्ण वास्तु बिंदुओं में से एक मानी जाती है। कई बार जानकारी के अभाव में लोग अपने घर में गलत दिशा में सीढ़ियों का निर्माण करवा लेते हैं या फिर सीढ़ियों की घूमने की दिशा यानी क्लॉकवाइज या एंटी-क्लॉकवाइज होने के नियमों को नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु जानकारों का मानना है कि घर में सीढ़ियों की गलत स्थिति के कारण परिवार के सदस्यों को आर्थिक तंगी, करियर में रुकावट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यदि आपके भी घर में सीढ़ियों को लेकर किसी प्रकार का वास्तु दोष है या सीढ़ियां एंटी-क्लॉकवाइज बनी हुई हैं, तो कुछ बेहद आसान और अचूक उपायों को अपनाकर इन नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि वास्तु के अनुसार सीढ़ियों की सही स्थिति क्या होनी चाहिए और दोष निवारण के उपाय क्या हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में सीढ़ियां बनवाने के लिए कौन सी दिशा है सबसे उत्तम
वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत बड़ा महत्व है और हर दिशा किसी न किसी देवता या ऊर्जा से जुड़ी होती है। जब घर के भीतर ऊपर जाने वाली सीढ़ियों के निर्माण की बात आती है, तो दक्षिण (South) और पश्चिम (West) दिशा को सबसे उत्तम और शुभ माना गया है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण (South-West) सीढ़ियों के लिए सबसे श्रेष्ठ स्थान माना जाता है। इस दिशा में सीढ़ियां होने से घर में स्थिरता आती है, परिवार के मुखिया की मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके विपरीत, कभी भी उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा में मुख्य सीढ़ियों का निर्माण नहीं करवाना चाहिए, क्योंकि यह ईशान कोण से जुड़ा क्षेत्र होता है जो हल्की और खुली ऊर्जा के लिए होता है। उत्तर या पूर्व दिशा में भारी सीढ़ियां होने से धन का आगमन रुक जाता है और परिवार के सदस्यों को लगातार मानसिक तनाव व स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
एंटी-क्लॉकवाइज सीढ़ियों के क्या होते हैं नकारात्मक प्रभाव और वास्तु दोष
सीढ़ियों के निर्माण में एक और महत्वपूर्ण नियम उनकी घूमने की दिशा का होता है, जिसे क्लॉकवाइज (घड़ी की सुई की दिशा में) या एंटी-क्लॉकवाइज (घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में) परखा जाता है। वास्तु नियमों के अनुसार घर के अंदर चढ़ने वाली सीढ़ियां हमेशा क्लॉकवाइज यानी दक्षिण से पश्चिम या पश्चिम से उत्तर की ओर घूमते हुए ऊपर जानी चाहिए। यदि किसी घर में सीढ़ियां एंटी-क्लॉकवाइज यानी उल्टी दिशा में घूमती हैं, तो इसे एक बड़ा वास्तु दोष माना जाता है। इस प्रकार के दोष के कारण घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है, तरक्की के रास्ते में बार-बार रुकावटें आती हैं और अनावश्यक खर्चों में बेतहाशा वृद्धि होने लगती है। कई बार लोगों को समझ ही नहीं आता कि तमाम कोशिशों के बावजूद उनके घर में बरकत क्यों नहीं हो रही है, जबकि असली वजह घर की बनावट और सीढ़ियों की गलत दिशा होती है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय वास्तु में बताए गए कुछ सरल उपायों का सहारा लिया जा सकता है।
एंटी-क्लॉकवाइज सीढ़ियों के वास्तु दोष दूर करने के 2 अचूक और सरल उपाय
यदि आपके घर में पहले से ही सीढ़ियां बनी हुई हैं और वे एंटी-क्लॉकवाइज या गलत दिशा में हैं, जिन्हें तोड़ना संभव नहीं है, तो वास्तु शास्त्र में कुछ बेहद प्रभावी और सरल उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर ऊर्जा के संतुलन को ठीक किया जा सकता है। पहला अचूक उपाय रंग और प्रकाश (Color & Lighting) का संतुलन है। सीढ़ियों के आसपास हमेशा हल्के और सकारात्मक रंगों जैसे कि क्रीम, हल्का पीला या ऑफ-व्हाइट का इस्तेमाल करना चाहिए और वहां कभी भी अंधेरा नहीं रखना चाहिए। सीढ़ियों के पास एक तेज रोशनी वाला बल्ब या हैंगिंग लाइट हमेशा जलती रहनी चाहिए ताकि वहां सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण उपाय फेंगशुई और वास्तु के प्रतीक चिन्हों का प्रयोग है। आप सीढ़ियों की शुरुआत या उसके आसपास तांबे के पिरामिड (Copper Pyramids) स्थापित कर सकते हैं या फिर नौ पिरामिडों का एक सेट सही दिशा में लगवा सकते हैं। इसके अलावा सीढ़ियों के नीचे के खाली स्थान को कभी भी कबाड़, जूते-चप्पल या गंदे सामान रखने की जगह न बनाएं, बल्कि उसे हमेशा साफ-सुथरा रखें। इन छोटे-छोटे बदलावों से सीढ़ियों के नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक बेअसर हो जाते हैं।
सीढ़ियों से जुड़े अन्य जरूरी वास्तु नियम जिनका रखना चाहिए विशेष ध्यान
घर की सुख-शांति और तरक्की के लिए सीढ़ियों के निर्माण के दौरान कुछ अन्य बुनियादी नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। सबसे पहली बात यह है कि सीढ़ियों की कुल संख्या हमेशा विषम (Odd numbers) यानी जैसे 11, 15, 17 या 21 होनी चाहिए, न कि सम संख्या में। इसके अलावा सीढ़ियों के ठीक नीचे कभी भी पूजा घर, किचन या मुख्य बाथरूम नहीं बनवाना चाहिए, क्योंकि यह अत्यंत अशुभ माना जाता है और इससे घर के सदस्यों के जीवन पर बुरा असर पड़ता है। सीढ़ियों के नीचे का खाली स्थान अगर खुला है तो वहां पौधे रखे जा सकते हैं या एक सुंदर सिटिंग एरिया बनाया जा सकता है, लेकिन वहां गंदगी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। वास्तु के इन नियमों का यदि सही ढंग से पालन किया जाए, तो घर में हमेशा सुख-समृद्धि, सकारात्मकता और वैभव का वास बना रहता है।