अगस्त में 268 लोग बने डॉग बाइट का शिकार, स्वास्थ्य विभाग की इस चौंकाने वाली रिपोर्ट ने उड़ाई शहरवासियों की नींद

अगस्त में 268 लोग बने डॉग बाइट का शिकार, स्वास्थ्य विभाग की इस चौंकाने वाली रिपोर्ट ने उड़ाई शहरवासियों की नींद

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ जिले से एक बेहद डरावनी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे शहर के नागरिकों और स्थानीय प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। आए दिन सड़कों पर घूमते बेकाबू आवारा कुत्तों का आतंक अब इस हद तक बढ़ चुका है कि आम आदमी का घर से बाहर निकलना भी दूभर होता जा रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इन खूंखार और आवारा कुत्तों के निशाने पर है, जिससे शहर के लोगों में भारी खौफ का माहौल बना हुआ है। हाल ही में सामने आई स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट ने इन डरावनी सच्चाइयों पर मुहर लगा दी है, जिसे देखकर हर कोई सकते में है। स्थिति कितनी भयावह हो चुकी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल एक ही महीने यानी अगस्त के दौरान शहर में डॉग बाइट के रिकॉर्डतोड़ मामले दर्ज किए गए हैं। इस विकराल समस्या के समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं, क्योंकि लगातार शिकायतों के बावजूद धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है।

अगस्त महीने में 268 लोगों को कुत्तों ने बनाया अपना शिकार, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों ने खोली पोल

मनेंद्रगढ़ जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कार्यालय से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में आवारा कुत्तों के काटने (डॉग बाइट) के कुल 268 मामले दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि महीनेभर में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का घायल होना किसी बड़ी आपदा से कम नहीं है। अस्पताल पहुंचने वाले पीड़ितों में अधिकांश संख्या छोटे बच्चों, बुजुर्गों और सुबह टहलने निकलने वाले मॉर्निंग वॉकर्स की है, जिन पर आवारा कुत्तों ने अचानक हमला कर दिया। जिला अस्पताल और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने वाले मरीजों की लंबी-लंबी कतारें आम बात हो चुकी हैं, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि शहर में आवारा कुत्तों का खतरा कितना गंभीर रूप ले चुका है। जानकारों का कहना है कि ये तो केवल वे आंकड़े हैं जो सरकारी अस्पतालों में पंजीकरण के बाद सामने आए हैं, जबकि कई लोग निजी क्लीनिकों में इलाज कराते हैं, जिन्हें जोड़ दिया जाए तो यह संख्या और भी डरावनी हो सकती है।

शहर की गलियों और मुख्य मार्गों पर लावारिस कुत्तों का राज, बच्चों और बुजुर्गों का निकलना हुआ मुश्किल

मनेंद्रगढ़ के विभिन्न वार्डों, कॉलोनियों और मुख्य बाजारों की सड़कों पर इन दिनों आवारा कुत्तों का ऐसा खौफनाक साम्राज्य स्थापित हो चुका है कि लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं। झुंड के झुंड में घूमने वाले ये खूंखार कुत्ते राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और विशेषकर स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों पर अचानक झपट पड़ते हैं। कई मामलों में तो तेज रफ्तार दोपहिया वाहनों के पीछे भागने के कारण वाहन चालक असंतुलित होकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर पालिका और संबंधित स्थानीय प्रशासन को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद आवारा कुत्तों की नसबंदी या उन्हें पकड़कर शहर से बाहर ले जाने के लिए कोई प्रभावी अभियान नहीं चलाया गया है। नतीजतन, शहर की हर गली और चौराहे पर लावारिस कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और वे अधिक आक्रामक होते जा रहे हैं।

जिला प्रशासन और नगर पालिका की कार्यशैली पर उठे सवाल, जल्द ठोस कदम उठाने की उठी मांग

बढ़ते डॉग बाइट के मामलों और नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में देख अब मनेंद्रगढ़ के स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस दिशा में कोई कड़े कदम नहीं उठाए, तो स्थिति और अधिक बेकाबू हो जाएगी, जिससे किसी बड़ी अनहोनी से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। नागरिकों ने मांग की है कि नगर पालिका द्वारा तुरंत प्रभाव से एक विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों को पकड़ा जाए और उनका टीकाकरण तथा नसबंदी का कार्य युद्धस्तर पर किया जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए क्षेत्र में एंटी-रेबीज टीकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ लावारिस कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने के लिए एक स्थाई कार्ययोजना तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है।