RBI का ऐतिहासिक ओएमओ ,बाजार में डाले 6.6 लाख करोड़ रुपये, फिर भी ब्याज दरों में असमानता बरकरार

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News India Live, Digital Desk: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने तरलता (Liquidity) बढ़ाने के लिए इस वित्त वर्ष में अब तक का सबसे बड़ा ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) चलाया है। इसके तहत बाजार में करीब 6.6 लाख करोड़ रुपये की नकदी डाली गई है। इसके बावजूद, सरकारी बॉन्ड और निवेश के अन्य साधनों पर ब्याज दरें उम्मीद के मुताबिक कम नहीं हो रही हैं। एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की ताजा रिपोर्ट में इस स्थिति को 'असमान ट्रांसमिशन' (Uneven Transmission) करार दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने पिछले एक साल में रेपो रेट में 1.25% की कटौती की है, लेकिन इसका असर बाजार के हर हिस्से में एक जैसा नहीं दिख रहा है।

तरलता का महा-अभियान: आंकड़ों की जुबानी

एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष के अनुसार, बाजार में डाली गई कुल नकदी का आंकड़ा चौंकाने वाला है:

OMO के जरिए: ₹6.6 लाख करोड़।

शुद्ध नकदी (Net Liquidity): यदि सीआरआर (CRR) कटौती, स्वैप और करेंसी लीकेज को मिला दें, तो प्रभावी रूप से ₹5.5 लाख करोड़ बाजार में पहुंचे हैं।

दावा: यह भारतीय मौद्रिक इतिहास का सबसे बड़ा तरलता प्रबंधन ऑपरेशन है।

बैंकों से कर्ज लेना हुआ सस्ता, कंपनियां खुश

रिपोर्ट में एक सकारात्मक पहलू यह सामने आया है कि बैंकों की कर्ज दरों में अच्छी गिरावट आई है।

EBLR का जादू: बैंकों के लगभग 65% लोन बाहरी बेंचमार्क (EBLR) से जुड़े हैं, इसलिए रेपो रेट कट का फायदा ग्राहकों तक तेजी से पहुंचा है।

ब्याज दर में कमी: नए रुपये कर्ज पर औसत दर नवंबर 2025 तक 62 बेसिस पॉइंट (BPS) घटकर 8.71% पर आ गई है।

कॉरपोरेट शिफ्ट: अब बड़ी कंपनियां बाजार (बॉन्ड) से पैसा जुटाने के बजाय बैंकों से कर्ज लेना ज्यादा सस्ता और फायदेमंद मान रही हैं।

बॉन्ड मार्केट और राज्यों के कर्ज पर 'ब्रेक'

इतनी नकदी के बाद भी कुछ क्षेत्रों में ब्याज दरें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं:

मुद्रा बाजार (Money Market): अगस्त 2025 से यहां ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखी गई है।

स्टेट लोन (SDL): राज्यों द्वारा लिए जाने वाले कर्ज पर औसत ब्याज दर 7.16% रही, जिसमें पिछले साल के मुकाबले केवल 0.07% की मामूली कमी आई है।

कॉरपोरेट बॉन्ड यील्ड: 10 वर्षीय AAA रेटिंग वाले बॉन्ड की यील्ड जून के बाद से फिर से बढ़ने लगी है।

RBI के नए प्रयोग और SBI का सुझाव

रिपोर्ट में आरबीआई द्वारा 90 दिनों के रेपो लोन को समय से पहले चुकाने के फैसले को 'वैश्विक स्तर पर अनोखा' बताया गया है। एसबीआई रिसर्च ने सुझाव दिया है कि:

आरबीआई को उन बॉन्ड में OMO करना चाहिए जिनमें ट्रेडिंग ज्यादा होती है।

इससे बाजार को स्पष्ट संकेत मिलेगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

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