आर्थिक सर्वेक्षण क्या है? बजट से पहले पेश होने वाले इस रिपोर्ट कार्ड की हर छोटी-बड़ी बात जानें

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News India Live, Digital Desk: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। लेकिन बजट से ठीक पहले, 29 जनवरी को संसद के पटल पर 'आर्थिक सर्वेक्षण' (Economic Survey) रखा जाएगा। आम तौर पर यह बजट से एक दिन पहले आता है, लेकिन इस बार इसे दो दिन पहले पेश किया जा रहा है।

अगर बजट भविष्य की योजनाओं का खाका है, तो आर्थिक सर्वेक्षण पिछले साल का 'परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड' है। आइए समझते हैं कि यह दस्तावेज क्या है और आपके लिए क्यों महत्वपूर्ण है।

क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?

आर्थिक सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय का सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक दस्तावेज है। यह देश की अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विश्लेषण करता है।

इतिहास: भारत में पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में पेश किया गया था। 1964 तक इसे बजट के साथ ही पेश किया जाता था, लेकिन उसके बाद से इसे बजट से अलग कर दिया गया।

कौन तैयार करता है? इसे वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की 'इकोनॉमिक डिवीजन' तैयार करती है। इसकी मुख्य जिम्मेदारी मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की होती है। वर्तमान में वी. अनंत नागेश्वरन देश के CEA हैं।

आर्थिक सर्वेक्षण में क्या-क्या शामिल होता है?

यह 300-400 पन्नों का एक विस्तृत दस्तावेज होता है, जिसे दो हिस्सों में बांटा जाता है:

भाग 1: इसमें अर्थव्यवस्था का ओवरव्यू और आने वाले साल के लिए चुनौतियों व संभावनाओं का जिक्र होता है।

भाग 2: इसमें कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग जैसे अलग-अलग सेक्टरों का डेटा आधारित विश्लेषण (Sector-wise analysis) होता है।

मुख्य आकर्षण:

GDP ग्रोथ: वास्तविक जीडीपी ग्रोथ के अनुमान और सेक्टर ब्रेकडाउन।

महंगाई: खाद्य मुद्रास्फीति और महंगाई दर का रुझान।

रोजगार: लेबर मार्केट की स्थिति और नौकरियों का डेटा।

रोडमैप: 'विकसित भारत@2047' के लक्ष्यों की प्रगति और सुधार (Rerforms)।

इसका महत्व: क्यों है यह बजट से ज्यादा 'सटीक'?

सरकार सर्वे में दिए गए सुझावों को मानने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है, लेकिन फिर भी इसका महत्व बहुत अधिक है:

पॉलिसी मेकिंग: बजट की कई बड़ी घोषणाएं सर्वे के सुझावों और डेटा पर आधारित होती हैं।

ग्लोबल इमेज: वर्ल्ड बैंक और IMF जैसे वैश्विक संगठन इसे देखकर भारत की क्रेडिट रेटिंग तय करते हैं।

निवेशकों का भरोसा: विदेशी निवेशक सर्वे के आंकड़ों को देखकर ही भारत में निवेश का फैसला लेते हैं।

आम आदमी के लिए यह क्यों जरूरी है?

आर्थिक सर्वेक्षण केवल अर्थशास्त्रियों के लिए नहीं, बल्कि आपके लिए भी मायने रखता है:

लोन और ईएमआई: यदि सर्वे महंगाई बढ़ने का संकेत देता है, तो मान लीजिए कि आने वाले समय में RBI रेपो रेट बढ़ा सकता है, जिससे आपका होम लोन महंगा हो सकता है।

नौकरी के अवसर: सर्वे बताता है कि किन सेक्टरों में ग्रोथ है, जिससे युवाओं को रोजगार की संभावनाओं का पता चलता है।

महंगाई का अनुमान: इससे पता चलता है कि आने वाले समय में खाने-पीने की चीजें सस्ती होंगी या महंगी।