RBI Action 2026: कर्नाटक के शिमशा सहकारा बैंक का लाइसेंस रद्द! हाईकोर्ट से याचिका खारिज होते ही लगा ताला, जानें ग्राहकों के ₹5 लाख का क्या होगा?
मंड्या/बेंगलुरु। कर्नाटक के बैंकिंग सेक्टर से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंड्या जिले के मद्दूर में स्थित शिमशा सहकारा बैंक नियमिता (Shimsha Sahakara Bank Niyamitha) का लाइसेंस पूरी तरह से रद्द कर दिया है। लगभग दो साल से चल रही कानूनी लड़ाई और हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार नियमों की जीत हुई है। यह फैसला उन ग्राहकों के लिए बड़ा झटका है जिनका पैसा इस सहकारी बैंक में जमा था। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों बैंक पर ताला लगा और अब जमाकर्ताओं को उनका पैसा कैसे वापस मिलेगा।
विवाद की जड़: 2024 से शुरू हुआ था 'एक्शन'
इस मामले की शुरुआत 05 जुलाई 2024 को हुई थी, जब आरबीआई ने बैंक की खराब वित्तीय स्थिति और नियमों की अनदेखी को देखते हुए उसका लाइसेंस रद्द करने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट का स्टे: बैंक ने इस आदेश के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में रिट याचिका (No. 19767/2024) दायर की। 25 जुलाई 2024 को कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए आरबीआई की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
2026 में अंतिम फैसला: कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण बैंक को समय-समय पर मोहलत मिलती रही, जो आखिरी बार 24 मई 2026 तक के लिए बढ़ाई गई थी। लेकिन 17 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने बैंक की याचिका को 'वापस लिए जाने के कारण' खारिज कर दिया। याचिका खारिज होते ही आरबीआई का पुराना आदेश फिर से प्रभावी हो गया।
बैंक पर लगे कड़े प्रतिबंध: अब क्या नहीं कर पाएगा बैंक?
लाइसेंस रद्द होने का मतलब है कि बैंक अब एक सामान्य वित्तीय संस्थान के रूप में काम नहीं कर सकता। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 के तहत बैंक पर ये पाबंदियां तुरंत लागू हो गई हैं:
बैंकिंग कामकाज पर रोक: बैंक अब न तो किसी से नया जमा (Deposit) स्वीकार कर सकता है और न ही किसी को लोन या पैसा दे सकता है।
नाम का इस्तेमाल: बैंक अब अपने नाम के साथ 'बैंक' या 'बैंकिंग' शब्द का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।
वित्तीय लेनदेन बंद: किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर या चेक क्लियरिंग अब इस बैंक के जरिए संभव नहीं होगी।
ग्राहकों के लिए राहत की बात: ₹5 लाख तक का बीमा कवर
बैंक का लाइसेंस रद्द होने के बाद सबसे बड़ा सवाल ग्राहकों की जमा पूंजी का होता है। यहां डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है।
₹5 लाख की सुरक्षा: नियमों के अनुसार, प्रत्येक जमाकर्ता को उसकी मूल राशि और ब्याज मिलाकर अधिकतम ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) तक का बीमा कवर मिलता है।
लिक्विडेशन प्रक्रिया: अब बैंक के लिए एक लिक्विडेटर (परिसमापक) नियुक्त किया जाएगा, जो बैंक की संपत्तियों को बेचकर देनदारियों का निपटारा करेगा।
पैसा कैसे मिलेगा: जमाकर्ताओं को एक निर्धारित फॉर्म भरकर अपना दावा पेश करना होगा, जिसके बाद DICGC द्वारा उनके खातों में बीमा राशि भेजी जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. मेरा खाता शिमशा सहकारा बैंक में है, क्या मेरा पैसा डूब गया?
नहीं, यदि आपकी जमा राशि ₹5 लाख या उससे कम है, तो वह पूरी तरह सुरक्षित है और DICGC द्वारा वापस की जाएगी। ₹5 लाख से अधिक की राशि के लिए आपको बैंक की संपत्तियों की नीलामी और लिक्विडेशन प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना होगा।
2. अब मुझे अपना पैसा निकालने के लिए क्या करना होगा?
आरबीआई अब एक लिक्विडेटर नियुक्त करेगा। इसके बाद स्थानीय अखबारों और बैंक के बाहर नोटिस जारी किया जाएगा। आपको अपने केवाईसी (KYC) दस्तावेजों के साथ दावा पेश करना होगा।
3. क्या बैंक दोबारा खुल सकता है?
नहीं, हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने और आरबीआई द्वारा लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद अब बैंक के दोबारा खुलने की संभावनाएं खत्म हो चुकी हैं।