Rang Panchami 2026 : कब है रंग पंचमी? इस दिन खेली जाती है देवताओं की होली,जानें शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा
News India Live, Digital Desk: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी मनाई जाती है। यह त्योहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश (इंदौर की प्रसिद्ध गेर) और राजस्थान के कुछ हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन हवा में उड़ाया गया रंग 'रज' और 'तम' गुणों का नाश करता है और दैवीय शक्तियों को जागृत करता है।
1. रंग पंचमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Dates & Timings)
साल 2026 में तिथियों की गणना इस प्रकार है:
पंचमी तिथि प्रारंभ: 7 मार्च 2026 को रात 10:45 बजे से।
पंचमी तिथि समाप्त: 8 मार्च 2026 को रात 09:12 बजे तक।
मुख्य त्योहार: उदया तिथि के अनुसार, रंग पंचमी 8 मार्च 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी।
2. देवताओं की होली: क्या है धार्मिक मान्यता? (Significance)
रंग पंचमी को केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विजय का प्रतीक माना जाता है:
सात्विक रंगों का प्रयोग: इस दिन सूखे गुलाल का उपयोग किया जाता है। माना जाता है कि जब गुलाल हवा में उड़ता है, तो उससे एक विशेष मंडल बनता है जो देवी-देवताओं को आकर्षित करता है।
बुरी शक्तियों का नाश: कहा जाता है कि इस दिन वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है और सकारात्मकता का संचार होता है।
3. रंग पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथा (The Legend)
इस त्योहार के पीछे एक बहुत ही प्रसिद्ध कथा प्रचलित है:
कामदेव और शिव की कथा: जब महादेव सती के वियोग में गहरी समाधि में लीन थे, तब तारकासुर का वध करने के लिए शिव-पार्वती का मिलन आवश्यक था। देवताओं के अनुरोध पर कामदेव ने शिव की समाधि भंग करने के लिए उन पर पुष्प बाण चलाया।
क्रोध और भस्म: क्रोधित होकर शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोला और कामदेव को भस्म कर दिया। बाद में कामदेव की पत्नी रति की विनती पर शिव ने उन्हें पुनर्जीवित होने का वरदान दिया।
जीत का उत्सव: कामदेव के पुनर्जीवित होने की खुशी में देवताओं ने रंग और गुलाल उड़ाकर उत्सव मनाया, जिसे रंग पंचमी के रूप में जाना जाने लगा।
4. कैसे मनाई जाती है रंग पंचमी? (Celebrations)
इंदौर की गेर: मध्य प्रदेश के इंदौर में रंग पंचमी पर निकलने वाली 'गेर' (होली का जुलूस) विश्व प्रसिद्ध है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं।
श्रीकृष्ण और राधा की पूजा: ब्रज के क्षेत्रों में इस दिन राधा-कृष्ण को विशेष रूप से गुलाल अर्पित किया जाता है।
धन प्राप्ति के उपाय: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती।