BREAKING:
March 29 2026 02:56 am

IGNOU की डिग्री पर संकट UGC की नई गाइडलाइंस ने बढ़ाई टेंशन, क्या बेकार हो जाएगी आपकी मेहनत? NET-JRF पर भी बड़ा अपडेट

Post

News India Live, Digital Desk: देश के सबसे बड़े ओपन यूनिवर्सिटी, इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) से डिग्री लेने वाले लाखों छात्रों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) की नई डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन एजुकेशन गाइडलाइंस ने इग्नू की डिग्रियों की वैधता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सबसे बड़ा झटका उन छात्रों को लगा है जिन्होंने MA पास करने के बाद UGC-NET और JRF की तैयारी की थी। नई नियमावली के अनुसार, अब दूरस्थ शिक्षा से प्राप्त कुछ डिग्रियां उच्च शिक्षा और फेलोशिप के लिए मान्य नहीं मानी जा सकती हैं।

UGC की नई 'कैंची': डिस्टेंस डिग्री धारकों की पात्रता पर लटकी तलवार

यूजीसी के नए नियमों ने डिस्टेंस मोड से पढ़ाई करने वाले छात्रों के बीच हड़कंप मचा दिया है। गाइडलाइंस में स्पष्ट संकेत दिया गया है कि ओपन और डिस्टेंस लर्निंग (ODL) के माध्यम से ली गई कुछ डिग्रियां रेगुलर डिग्रियों के बराबर नहीं मानी जाएंगी, खासकर शोध (Research) और प्रोफेसर बनने की पात्रता के मामले में। इस फैसले का सीधा असर उन हजारों छात्रों पर पड़ेगा जो नौकरी के साथ-साथ इग्नू से पीजी (Post Graduation) कर रहे थे और भविष्य में नेट-जेआरएफ (NET-JRF) के जरिए करियर बनाना चाहते थे।

MA पास करने के बाद भी नहीं मिलेगी JRF? छात्रों में भारी आक्रोश

नए नियमों के अनुसार, अगर किसी छात्र की डिग्री यूजीसी के नए मापदंडों को पूरा नहीं करती है, तो उसे यूजीसी नेट की परीक्षा में बैठने या जेआरएफ फेलोशिप पाने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। छात्रों का कहना है कि यह उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इग्नू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की डिग्री को इस तरह संदिग्ध दायरे में रखने से न केवल निजी बल्कि सरकारी नौकरियों में भी अड़चनें आ सकती हैं। देश भर के छात्र संगठनों ने इस 'डिग्री भेदभाव' के खिलाफ आवाज उठाना शुरू कर दिया है।

इग्नू और यूजीसी के बीच फंसा पेंच: क्या होगा आगे?

फिलहाल इग्नू प्रशासन और यूजीसी के बीच इस मुद्दे को लेकर स्पष्टीकरण का दौर जारी है। जानकारों का मानना है कि यदि यूजीसी अपने फैसले पर अडिग रहता है, तो इग्नू को अपने कोर्स स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव करने होंगे। छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी डिग्री की स्टेटस चेक करें और नए नियमों के क्लॉज को ध्यान से पढ़ें। यह विवाद अब शिक्षा मंत्रालय की दहलीज तक पहुंच गया है, जहां लाखों डिस्टेंस लर्नर्स की उम्मीदें टिकी हैं कि क्या उन्हें रेगुलर छात्रों के बराबर का दर्जा वापस मिल पाएगा।