रांची वालों ये क्या हो रहा है? मरीजों के लिए जगह कम पड़ रही और भू-माफियाओं ने दबा ली रिम्स की जमीन
News India Live, Digital Desk: हम और आप जानते हैं कि रिम्स (RIMS) यानी राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान, पूरे झारखंड की लाइफलाइन है। राज्य के कोने-कोने से गरीब मरीज यहाँ उम्मीद लेकर आते हैं। अक्सर हमें खबरें सुनने को मिलती हैं कि रिम्स में बेड की कमी है, मरीज जमीन पर लेटने को मजबूर हैं। हम सोचते हैं कि शायद जगह कम होगी।
लेकिन दोस्तों, सच्चाई कुछ और ही है। हाल ही में जो खुलासा हुआ है, उसे सुनकर आप अपना सिर पकड़ लेंगे। रिम्स के पास जगह की कमी नहीं है, बल्कि उसकी बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जा (Illegal Encroachment) हो रखा है।
झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है और प्रशासन को आईना दिखाया है। आइए, आसान भाषा में जानते हैं कि आखिर माजरा क्या है।
10 एकड़ जमीन पर 'खेल' हो गया!
सुनने में छोटा लग सकता है, लेकिन 10 एकड़ जमीन बहुत होती है। इतनी जगह में कई नए वार्ड, हॉस्टल या पार्किंग बन सकती थी।
झारखंड हाईकोर्ट में चल रही एक सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि रिम्स की लगभग 10 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है। वहां झुग्गियां, दुकानें या पक्के निर्माण बना लिए गए हैं।
हैरानी की बात यह है कि यह सब प्रशासन और रिम्स प्रबंधन की नाक के नीचे होता रहा और किसी ने इसे रोकने की जहमत नहीं उठाई।
हाईकोर्ट ने लगाई फटकार: "कब जागोगे?"
इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जजों ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ पूछा कि एक सरकारी और इतने महत्वपूर्ण अस्पताल की जमीन पर कब्जा कैसे हो गया?
कोर्ट का मानना है कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही के इतना बड़ा अतिक्रमण संभव नहीं है।
अब क्या होगा?
हाईकोर्ट के सख्त तेवरों को देखकर लगता है कि अब रिम्स की जमीन को मुक्त कराने के लिए बड़ा एक्शन लिया जाएगा।
- रिपोर्ट तलब: कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से पूरी रिपोर्ट मांगी है कि अतिक्रमण कहाँ-कहाँ है और इसे हटाने के लिए अब तक क्या किया गया।
- कार्रवाई का आदेश: माना जा रहा है कि जल्द ही प्रशासन को अतिक्रमण हटाने (Anti-Encroachment Drive) के लिए पुलिस-बल के साथ उतरना पड़ेगा।
यह जनता के लिए क्यों जरुरी है?
दोस्तों, यह जमीन किसी नेता या अधिकारी की नहीं, बल्कि जनता की है। अगर यह 10 एकड़ जमीन खाली होती है, तो वहां नए डॉक्टर्स के क्वार्टर बन सकते हैं, मरीजों के परिजनों के लिए रैन-बसेरा बन सकता है, या ओपीडी का विस्तार हो सकता है।
जमीन कब्ज़ाने वालों के मजे हैं, और पिस रहा है वो गरीब मरीज जो इलाज के लिए लाइन में खड़ा है। उम्मीद है कि हाईकोर्ट के डंडे के बाद अब सिस्टम की नींद खुलेगी।