राजस्थान का सबसे बड़ा ट्रॉमा सेंटर आग लगने के बाद बुरी तरह चरमराया, ICU की कमी से मरीजों की जान खतरे में
News India Live, Digital Desk: राजस्थान के जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर, जो पूरे राज्य का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र है, इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है. हाल ही में यहां के आईसीयू (ICU) वार्ड में लगी भीषण आग ने स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसके कारण अब मरीजों, खासकर गंभीर मरीजों को, आईसीयू बेड (ICU Shortage) के लिए भटकना पड़ रहा है. इस दुखद घटना ने न केवल अस्पताल प्रशासन बल्कि आम जनता और सरकार को भी सकते में डाल दिया है.
आग की घटना और उसका दिल दहला देने वाला असर
लगभग एक सप्ताह पहले, अक्टूबर 2025 की शुरुआत में, एसएमएस ट्रॉमा सेंटर के सेकंड फ्लोर पर स्थित आईसीयू वार्ड में अचानक भीषण आग लग गई थी. इस अग्निकांड के कारण 6 से 8 गंभीर मरीजों की दुखद मौत हो गई थी, और वहां भर्ती 250 से अधिक मरीजों को जान बचाते हुए धुएं के बीच सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा था. इस दौरान अस्पताल परिसर में चारों ओर अफरा-तफरी मच गई थी. शुरुआती जांच में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, हालांकि प्रशासन 4 महीने पहले हुई एक शिकायत की अनदेखी करने का आरोप भी झेल रहा है, जिसमें ICU की दीवारों में करंट आने की बात कही गई थी.
यह भीषण आग मुख्य रूप से ट्रॉमा सेंटर के सेकंड फ्लोर पर स्थित आईसीयू वार्ड में लगी थी, जिसके चलते आईसीयू सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं. आग के धुएं और आग बुझाने की प्रक्रिया ने पूरे आईसीयू बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया, जिससे कई गंभीर मरीजों की जान बचाना भी मुश्किल हो गया क्योंकि आईसीयू से उन्हें तुरंत दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा था.
ICU बेड का गंभीर संकट: मरीजों की दुविधा बढ़ी
इस अग्निकांड का सबसे भयावह परिणाम यह हुआ है कि ट्रॉमा सेंटर में आईसीयू बेड की भारी कमी हो गई है. मिली जानकारी के अनुसार, ट्रॉमा सेंटर में पहले कुल चार आईसीयू वार्ड पूरी क्षमता से काम कर रहे थे, लेकिन आग लगने के बाद अब उनमें से केवल दो ही वार्ड (ट्रॉमा आईसीयू और सेमी-आईसीयू) किसी तरह चालू स्थिति में हैं. इसके परिणामस्वरूप, रोजाना आने वाले सैकड़ों गंभीर मरीजों को, जिन्हें तत्काल गहन चिकित्सा की जरूरत होती है, इलाज के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. कई मरीजों को तो मजबूरन दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है, या वे इलाज के इंतजार में परेशान हो रहे हैं.
यह गंभीर संकट न केवल अस्पताल प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि यह राजस्थान में चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है. उम्मीद है कि प्रशासन जल्द से जल्द प्रभावित आईसीयू वार्डों की मरम्मत करके और आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था करके पूरी क्षमता से सेवाएं शुरू करेगा ताकि मरीजों की मुश्किलें कम हो सकें और इस तरह की दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो