राजस्थान निकाय चुनाव का सबसे बड़ा महासंग्राम: 39 जिलों के 5393 वार्डों के लिए पोलिंग टीमें हुई रवाना

राजस्थान निकाय चुनाव का सबसे बड़ा महासंग्राम: 39 जिलों के 5393 वार्डों के लिए पोलिंग टीमें हुई रवाना

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है, जहां प्रदेश के 39 जिलों में होने वाले नगर निकाय चुनावों के पहले चरण के मतदान के लिए अब उलटी गिनती शुरू हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी करते हुए निर्वाचन विभाग ने चुनाव वाले सभी क्षेत्रों के लिए पोलिंग पार्टियों को पूरी सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMS) के साथ रवाना कर दिया है। राज्य भर के 5393 वार्डों में कल यानी बुधवार को होने वाले इस मतदान में कुल 20,623 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला होना है, जिसकी वजह से राजनीतिक दलों के दिग्गजों से लेकर आम मतदाताओं तक में भारी उत्साह और तनाव दोनों का माहौल देखा जा रहा है। स्थानीय शहरी निकायों की यह जंग इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इसे आने वाले विधानसभा और लोकसभा समीकरणों का सेमीफाइनल कहा जा रहा है, जहाँ हर पार्टी अपनी जीत का परचम लहराने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है। जिला प्रशासन ने निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने के लिए पानी की तरह सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से समय रहते निपटा जा सके।

मतदान की तैयारियां अंतिम चरण में, पोलिंग पार्टियों की रवाना से गांवों और शहरों में बढ़ी हलचल

राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार कल होने वाले मतदान को लेकर प्रशासनिक अमला पिछले कई दिनों से दिन-रात एक करने में जुटा हुआ था, जिसका परिणाम यह रहा कि तय समय सीमा के भीतर सभी मतदान केंद्रों के लिए पोलिंग टीमों को रवाना कर दिया गया है। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष पुलिस बल, होमगार्ड्स और सेक्टर मजिस्ट्रेटों की तैनाती कर दी गई है ताकि असामाजिक तत्व किसी भी तरह की गड़बड़ी न फैला सकें। जिला मुख्यालयों पर बनाए गए डिस्पैच सेंटरों से जब कर्मचारियों को मतपेटियों, ईवीएम मशीनों और अन्य जरूरी चुनावी सामग्रियों के साथ रवाना किया गया, तो वहां सुरक्षा के कड़े घेरे देखने को मिले। निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।

39 जिलों के 5393 वार्डों का रण और 20,623 उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा दांव पर

इस बार के निकाय चुनावों का दायरा बेहद व्यापक है, जिसमें राजस्थान के लगभग सभी प्रमुख 39 जिलों के शहरी और अर्ध-शहरी निकाय शामिल किए गए हैं। कुल 5393 वार्डों के लिए हो रहे इस दंगल में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी, विपक्षी कांग्रेस पार्टी और कई निर्दलीय तथा बागी उम्मीदवार मैदान में डटे हुए हैं, जिससे कुल 20,623 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद होने वाली है। टिकट वितरण से लेकर चुनाव प्रचार के अंतिम दौर तक जिस तरह की बयानबाजी और रैलियों का दौर देखने को मिला है, उससे यह साफ जाहिर होता है कि हर एक वार्ड की सीट जीतने के लिए राजनीतिक दलों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। कई सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है, जहां बागी उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला और भी ज्यादा त्रिकोणीय और दिलचस्प हो गया है। मतदाताओं की चुप्पी ने सभी दलों के नेताओं की धड़कनों को बढ़ा रखा है, क्योंकि इस बार का वोटर खुलकर अपने पत्ते नहीं खोल रहा है।

सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम और निष्पक्ष मतदान के लिए निर्वाचन विभाग की पैनी नजर

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है, और राजस्थान के इन निकाय चुनावों में इसे सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। मतदान केंद्रों पर वीडियोग्राफी की व्यवस्था के साथ-साथ माइक्रो ऑब्जर्वर भी तैनात किए गए हैं जो पल-पल की रिपोर्ट सीधे जिला निर्वाचन कार्यालय को भेजेंगे। पुलिस प्रशासन ने सीमावर्ती इलाकों और संवेदनशील बस्तियों में फ्लैग मार्च निकालकर असामाजिक तत्वों को कड़ी चेतावनी दे दी है कि मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने वालों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मतदाताओं से भी लगातार अपील की जा रही है कि वे बिना किसी डर, लालच या दबाव के अपने मताधिकार का बढ़-चढ़कर इस्तेमाल करें और लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।

लोकतंत्र के इस महापर्व पर कल सुबह तय होगी उम्मीदवारों की असली परीक्षा

चुनाव प्रचार का शोर थमने के बाद अब उम्मीदवारों की असली परीक्षा कल सुबह से शुरू होने वाले मतदान के साथ शुरू हो जाएगी, जब मतदाता कतारों में लगकर अपने चहेते पार्षद और प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। मौसम का मिजाज भी इस समय चुनावी गतिविधियों के अनुकूल बना हुआ है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार मतदान का प्रतिशत काफी अच्छा रह सकता है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह चुनाव केवल पार्षदों के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय विकास कार्यों और जनता के गुस्से या समर्थन का सटीक पैमाना साबित होगा। मतदान संपन्न होने के बाद मतपेटियों के सील होने से लेकर मतगणना के दिन आने वाले परिणामों तक हर किसी की निगाहें इन चुनावों पर टिकी रहेंगी, और यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जनता आखिरकार किसके सिर पर जीत का सेहरा बांधती है।