दिल्ली के बवाल की आंच अब जयपुर की सियासत तक पहुंची

दिल्ली के बवाल की आंच अब जयपुर की सियासत तक पहुंची

देश की राजधानी दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक उठापटक का असर अब राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़कों और पुलिस मुख्यालय तक साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई (NSUI) की राष्ट्रीय सचिव और राजस्थान की बेटी रितु बराला के साथ कथित तौर पर हुई बर्बरता और मारपीट का मामला अब तूल पकड़ चुका है। इस पूरे प्रकरण को लेकर राजस्थान कांग्रेस ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पर मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली तक ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली और स्थानीय पुलिस के रवैये पर बड़े और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला और क्यों गरमाया है जयपुर का सियासी पारा?

यह पूरा विवाद दिल्ली में हुए उस छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है जिसमें निर्वाचन आयोग के खिलाफ आवाज उठाई गई थी। प्रदर्शन के दौरान राजस्थान की रहने वाली एनएसयूआई नेत्री रितु बराला को हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिसकर्मियों, विशेषकर महिला कर्मियों द्वारा कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार और मारपीट किए जाने के आरोप लगे हैं। रितु बराला का आरोप है कि पुलिस हिरासत में उनके साथ बदसलूकी की गई, बाल खींचे गए और गंभीर चोटें पहुंचाई गईं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भी भर्ती रहना पड़ा था। इस घटना का वीडियो सामने आने और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद से ही कांग्रेस पार्टी आक्रामक मुद्रा में आ गई है। राहुल गांधी के निर्देश के बाद ही राजस्थान के नेताओं ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई का दबाव बनाना शुरू किया।

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पर रातभर डटे रहे डोटासरा और कांग्रेस नेता

सोमवार शाम को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, रितु बराला और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ सबसे पहले मोती डूंगरी थाने पहुंचे थे ताकि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ शून्य प्राथमिकी (जीरो एफआईआर) दर्ज कराई जा सके। हालांकि, स्थानीय पुलिस द्वारा मामला दर्ज करने से इनकार किए जाने और इसे परिवाद के रूप में लेने के बाद कांग्रेस नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा। इसके बाद सभी नेता सीधे जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। रात का अंधेरा होने के बावजूद डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, प्रताप सिंह खाचरियावास और अन्य विधायक कमिश्नरेट के बाहर और अंदर डटे रहे। पूर्व सीएम अशोक गहलोत भी देर रात कमिश्नरेट पहुंचे और पुलिस की टालमटोल नीति की कड़ी आलोचना की।

गहलोत और डोटासरा ने पुलिस प्रशासन से पूछे कड़े सवाल

धरने के दौरान मीडिया और पुलिस अधिकारियों से मुखातिब होते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने तीखे सवाल किए। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब कानून देश में एक समान है और अन्य राज्यों में इस मामले पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है, तो राजस्थान पुलिस एफआईआर दर्ज करने से क्यों कतरा रही है? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दिल्ली पुलिस के दबाव में आकर यहां की पुलिस काम कर रही है? वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जीरो एफआईआर दर्ज करना पुलिस का कानूनी दायित्व है, लेकिन दबाव के चलते न्याय का गला घोंटा जा रहा है। नेताओं ने साफ कर दिया कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज करके कानूनी शिकंजा नहीं कसा जाता, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन और संघर्ष थमेगा नहीं।

कानून और न्याय की लड़ाई को सड़क से सदन तक ले जाने की तैयारी

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति या एक पार्टी की नहीं है, बल्कि यह देश की बेटियों के सम्मान और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ी हुई है। यदि एक महिला राजनीतिक कार्यकर्ता के साथ इस तरह की बर्बरता खुलेआम की जाएगी और पुलिस सुरक्षा के नाम परवान चढ़ेगी, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा। पार्टी के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन ने जल्दबाजी में उचित कानूनी कदम नहीं उठाया, तो इस आंदोलन को पूरे प्रदेशभर में और अधिक व्यापक स्तर पर फैलाया जाएगा। फिलहाल जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है और राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर बनी हुई है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।