ACB केस के बाद वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को लगा एक और बड़ा झटका
प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और हलचल मचा देने वाली खबर सामने आ रही है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज किए गए गंभीर मामले के बाद राजस्थान कैडर के वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी शिखर अग्रवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब राज्य शासन और संबंधित प्रशासनिक विभाग की ओर से उन्हें एक और बड़ा झटका देते हुए औपचारिक 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी कर दिया गया है। विभाग ने इस नोटिस का जवाब देने के लिए शिखर अग्रवाल को 7 दिनों की कड़ी समय-सीमा (Dead-line) दी है। यदि वे तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब दाखिल करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई को और अधिक सख्त किया जाएगा।
ACB केस के बाद IAS शिखर अग्रवाल की बढ़ीं मुश्किलें: जानिए क्या है पूरा मामला
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल पर एसीबी (ACB) द्वारा पद के दुरुपयोग, प्रक्रियागत अनिमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। एसीबी की एफआईआर और प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने इसे प्रशासनिक मर्यादा और सेवा नियमावली (All India Services Conduct Rules) का उल्लंघन माना है। इसी के तहत अब उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, नोटिस में शिखर अग्रवाल से उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए संदिग्ध प्रशासनिक फैसलों, सरकारी आवंटन और वित्तीय स्वीकृतियों को लेकर विस्तार से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
7 दिनों के भीतर देना होगा जवाब: जवाब न देने पर हो सकती है बड़ी विभागीय कार्रवाई
प्रशासनिक विभाग द्वारा जारी इस नोटिस में सख्त हिदायत दी गई है कि शिखर अग्रवाल को 7 कार्य दिवसों के भीतर अपना पक्ष लिखित रूप में प्रस्तुत करना होगा। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि वे निर्धारित समय-सीमा के अंदर अपना जवाब दाखिल नहीं करते हैं या प्रस्तुत किया गया स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया जाता है, तो यह मान लिया जाएगा कि उनके पास अपने बचाव में कहने के लिए कुछ नहीं है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार उनके खिलाफ निलंबन (Suspension), विभागीय जांच (Departmental Inquiry) या अन्य कठोर दंडात्मक कदम उठाने के लिए स्वतंत्र होगी।
प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप: नौकरशाही पर कसा शिकंजा
आईएएस शिखर अग्रवाल जैसे वरिष्ठ और प्रभावशाली अधिकारी को नोटिस जारी होने के बाद से राज्य के प्रशासनिक हलकों में भारी हड़कंप मच गया है। सरकार के इस कड़े रुख से साफ संदेश गया है कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाएगी, चाहे आरोपी कितना भी वरिष्ठ अधिकारी क्यों न हो। नौकरशाही के गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि एसीबी की जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ इस मामले में कुछ और अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।
क्या होगा शिखर अग्रवाल का अगला कानूनी व प्रशासनिक कदम?
कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आईएएस शिखर अग्रवाल और उनका विधिक परामर्शदाता (Legal Team) क्या रुख अपनाते हैं। माना जा रहा है कि वे तय समय-सीमा के भीतर अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत करेंगे या फिर कानूनी राहत पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। बहरहाल, एसीबी केस और अब कारण बताओ नोटिस के इस दोहरे झटके ने शिखर अग्रवाल के प्रशासनिक करियर को एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।