बाड़ेबंदी शुरू! उदयपुर से राजसमंद रिसॉर्ट में शिफ्ट किए जा रहे उम्मीदवार

बाड़ेबंदी शुरू! उदयपुर से राजसमंद रिसॉर्ट में शिफ्ट किए जा रहे उम्मीदवार

राजस्थान के उदयपुर जिले में जिला परिषद चुनाव के चरणबद्ध मतदान संपन्न होते ही स्थानीय राजनीति का पारा चरम पर पहुंच गया है। उदयपुर जिला परिषद में अपना बोर्ड बनाने और जिला प्रमुख की प्रतिष्ठित कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव परिणाम आने से पहले ही अपनी आक्रामक और अभेद्य रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक तोड़-फोड़ (हॉर्स ट्रेडिंग) की किसी भी गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करने के उद्देश्य से भाजपा ने अपने जीते हुए संभावित और चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने 25 से अधिक प्रमुख प्रत्याशियों को गुपचुप तरीके से लग्जरी बसों और निजी वाहनों के जरिए पड़ोसी जिले राजसमंद के एक बड़े गुप्त रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है।

उदयपुर से राजसमंद रिसॉर्ट में उम्मीदवारों की एंट्री: जानिए भाजपा की बाड़ेबंदी का पूरा सच

राजस्थान की पंचायती राज राजनीति में बाड़ेबंदी की परंपरा कोई नई नहीं है, लेकिन उदयपुर में मतदान संपन्न होने के तुरंत बाद प्रत्याशियों को अन्य जिले के रिसॉर्ट में भेजना भाजपा के शीर्ष रणनीतिकारों की दूरगामी सोच को दर्शाता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जिन वार्डों में पहले और दूसरे चरण का मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां के मजबूत प्रत्याशियों को पार्टी नेतृत्व द्वारा तुरंत शहर छोड़कर राजसमंद के रिसॉर्ट पहुंचने के कड़े निर्देश जारी किए गए थे। तीसरे चरण का मतदान संपन्न होने के बाद बाकी बचे वार्डों के प्रत्याशियों को भी सीधे इसी सुरक्षित बाड़ेबंदी में लाया जाएगा। इस रिसॉर्ट में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है और प्रत्याशियों के फोन बंद करवाकर केवल वरिष्ठ नेताओं की निगरानी में उनसे संपर्क साधा जा रहा है।

47 सीटों पर चला चुनावी घमासान: जिला प्रमुख पद के लिए दिग्गजों के नामों पर मंथन तेज

उदयपुर जिला परिषद की कुल 47 सीटों के लिए तीन प्रमुख चरणों में मतदान आयोजित कराया गया। पहले चरण में 25 वार्डों और दूसरे चरण में 14 वार्डों पर वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसके बाद शेष आठ वार्डों का मतदान संपन्न कराया जा रहा है। सभी 47 सीटों के चुनाव परिणाम और मतगणना आगामी 20 नवंबर को होगी। इसके तुरंत बाद 25 नवंबर को जिला प्रमुख और 26 नवंबर को उप जिला प्रमुख का चुनाव संपन्न कराया जाएगा। इस बार उदयपुर जिला प्रमुख की सीट अनारक्षित (ओपन) श्रेणी में आने के कारण भाजपा के भीतर भी लॉबिंग काफी तेज हो गई है। पार्टी के भीतर चंद्रगुप्त सिंह चौहान, दलीचंद डांगी, हिम्मत सिंह झाला, प्रतिभा नागदा और घनश्याम मेनारिया जैसे दिग्गज नेताओं के नाम जिला प्रमुख की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं।

कांग्रेस की रणनीति पर पैनी नजर: निर्दलीयों और किंगमेकरों को साधने की होड़

उदयपुर जिला परिषद चुनाव में भाजपा की इस आक्रामक बाड़ेबंदी ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को भी सकते में डाल दिया है। उदयपुर और आसपास की पंचायत समितियों में निर्दलीय उम्मीदवारों और अन्य स्थानीय क्षत्रपों की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। यदि चुनाव नतीजों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो निर्दलीय सदस्य ही 'किंगमेकर' की भूमिका निभाएंगे। यही कारण है कि भाजपा किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहती और 20 नवंबर को आने वाले नतीजों से पहले अपने कुनबे को पूरी तरह से एकजुट रखने में जुटी है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी परिणाम आने के बाद अपने समर्थित प्रत्याशियों को एकजुट करने की योजना पर काम कर रही है।

20 नवंबर के नतीजों और 25 नवंबर के जिला प्रमुख चुनाव पर टिकी पूरे राजस्थान की निगाहें

मेवाड़ की राजनीति में उदयपुर जिला परिषद का चुनाव हमेशा से बेहद खास और निर्णायक माना जाता रहा है। उदयपुर में जो दल जिला प्रमुख की कुर्सी हासिल करता है, उसका प्रभाव संभाग की अन्य विधानसभा सीटों पर भी व्यापक रूप से पड़ता है। राजसमंद के रिसॉर्ट में चल रही इस कड़ी बाड़ेबंदी के बीच अब हर किसी की निगाहें 20 नवंबर को होने वाली मतगणना और 25 नवंबर को होने वाले जिला प्रमुख के प्रत्यक्ष चुनाव पर टिकी हुई हैं। भाजपा नेताओं का दावा है कि इस बार उदयपुर जिला परिषद में स्पष्ट बहुमत के साथ भाजपा का ही बोर्ड बनेगा और पार्टी का ही निष्ठावान कार्यकर्ता जिला प्रमुख के पद पर आसीन होगा।