प्रताप सिंह खाचरियावास का सीएम भजनलाल पर अभद्र टिप्पणी से गरमाई राजस्थान की राजनीति

प्रताप सिंह खाचरियावास का सीएम भजनलाल पर अभद्र टिप्पणी से गरमाई राजस्थान की राजनीति

राजस्थान की सियासत इस समय एक बेहद तीखे और संवेदनशील मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहां आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के माहौल के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का एक विवादित बयान आग की तरह फैल चुका है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ दी गई इस कथित अभद्र और व्यक्तिगत टिप्पणी ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अंदर भारी उबाल ला दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव की सरगर्मी के बीच इस तरह की बयानबाजी से राज्य का राजनीतिक तापमान काफी ऊपर चला गया है, जिससे दोनों प्रमुख दलों के बीच आमने-सामने की जंग छिड़ गई है। बीजेपी नेताओं का साफ तौर पर कहना है कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह होते हैं, लेकिन किसी भी लोकतांत्रिक पद पर बैठे सर्वोच्च व्यक्ति के खिलाफ इस स्तर की अमर्यादित भाषा का प्रयोग कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह सीधे तौर पर जनता के जनादेश का अपमान है।

बीजेपी का आक्रामक रुख, खाचरियावास के बयान पर मांगा स्पष्टीकरण

जैसे ही यह विवादित बयान और इससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म्स पर वायरल हुआ, वैसे ही बीजेपी के तमाम दिग्गज नेता और कार्यकर्ता हमलावर मुद्रा में आ गए। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और बयानों के जरिए इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रताप सिंह खाचरियावास ने अपनी राजनीतिक हताशा में सारी हदें पार कर दी हैं। बीजेपी का यह भी आरोप है कि कांग्रेस पार्टी के नेता लगातार अपनी जमीन खिसकती देख इस तरह के ओछे हथकंडों पर उतर आए हैं ताकि किसी तरह सुर्खियों में बने रहें। पार्टी ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि पूर्व मंत्री ने जल्द से जल्द इस अभद्र टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, तो भारतीय जनता पार्टी पूरे प्रदेशभर में उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करेगी। इस घटनाक्रम के बाद से कांग्रेस खेमे में भी गहमागहमी बढ़ गई है और विपक्षी दल के नेता इस पूरे मामले पर सावधानीपूर्वक कदम रख रहे हैं।

स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले सियासी पारा चढ़ने के मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान में होने वाले आगामी निकाय चुनावों से ठीक पहले इस प्रकार के व्यक्तिगत और तीखे हमलों का शुरू होना किसी बड़े राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा भी हो सकता है। चुनाव के इस नाजुक वक्त में जब दोनों दल मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं, ऐसे में मुद्दों की राजनीति छोड़कर निजी टिप्पणियों पर बहस केंद्रित होना राज्य के विकास के लिए एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। कांग्रेस के भीतर भी इस बात की सुगबुगाहट है कि ऐसी बयानबाजी से पार्टी को स्थानीय स्तर पर वैचारिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि जनता अब विकास और बुनियादी सुविधाओं के आधार पर अपने नुमाइंदे चुनना चाहती है। बहरहाल, इस गरमागरम माहौल के बीच जहां एक तरफ बीजेपी आक्रामक तेवर अपनाए हुए है, वहीं आने वाले दिनों में यह विवाद राजस्थान की राजनीति को और अधिक किस दिशा में ले जाता है, यह देखने वाली बात होगी।