छत्तीसगढ़ में झीरम घाटी हमले को लेकर सियासी उबाल: डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कांग्रेस को दी खुली चुनौती

छत्तीसगढ़ में झीरम घाटी हमले को लेकर सियासी उबाल: डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कांग्रेस को दी खुली चुनौती

छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बहुचर्चित और संवेदनशील झीरम घाटी नरसंहार का मुद्दा पूरी तरह से गरमा गया है, जहां राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा और आक्रामक हमला बोलते हुए एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। पिछले कई सालों से राज्य की सियासत में केंद्र बिंदु बने रहे इस वीभत्स नक्सली हमले के फैसलों और उसके पीछे की साजिशों को लेकर कांग्रेस नेताओं द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों के जवाब में डिप्टी सीएम ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि सचमुच कांग्रेस के पास इस घटना से जुड़ा कोई ठोस सबूत या दस्तावेज मौजूद हैं, तो वे सियासी बयानबाजी करने के बजाय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अपने कागजात क्यों नहीं सौंप देते। इस तीखी बयानबाजी के बाद से छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल आ गया है और दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर एक बार फिर से तेज हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ने की पूरी संभावना है।

झीरम घाटी मामले पर राजनीति तेज, विजय शर्मा के बयान से कांग्रेस खेमे में मचा हड़कंप

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस के उन तमाम नेताओं पर जमकर निशाना साधा जो अक्सर यह दावा करते रहते हैं कि इस पूरे हत्याकांड के पीछे के असली साजिशकर्ताओं के राज उनके पास सुरक्षित हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ जनता के बीच जाकर झूठी सहानुभूति बटोरने या राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए बयान देना बहुत आसान होता है, लेकिन जब बात देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों के सामने तथ्य रखने की आती है, तो विपक्षी दल के नेता हमेशा पीछे हट जाते हैं। डिप्टी सीएम ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस सच में पीड़ितों को न्याय दिलाना चाहती है और अपनी नीयत पर साफ है, तो उन्हें बिना किसी देरी के अपने सभी कथित सबूत एनआईए के सुपुर्द कर देने चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। उनके इस बेबाक और कड़े रुख के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर भी हलचल मच गई है और पार्टी के वरिष्ठ नेता इस पर पलटवार करने की रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।

छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था और सुरक्षा मुद्दों पर गंभीर सवाल

इस सनसनीखेज राजनीतिक बहस के बीच छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से माओवादी हिंसा, सुरक्षा तंत्र की मजबूती और बीते सालों में हुए दर्दनाक हादसों की यादें ताजा हो गई हैं, जिससे आम जनता के मन में भी कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झीरम घाटी का नरसंहार राज्य के इतिहास का वह काला अध्याय है जिस पर हर चुनाव और राजनीतिक मंच से सियासत तो खूब की जाती है, लेकिन आज भी पीड़ितों के परिवारों को उस मुकम्मल न्याय का इंतजार है जिसके वे असल हकदार हैं। राज्य सरकार और विपक्ष के बीच चल रही इस तनातनी के चलते जहां एक तरफ प्रशासनिक जांच और उसकी पारदर्शिता पर चर्चाएं तेज हो गई हैं, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिक यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि राजनीति से ऊपर उठकर इस मामले में पूरी सच्चाई देश और प्रदेश की जनता के सामने आनी चाहिए। बहरहाल, डिप्टी सीएम विजय शर्मा की इस दो टूक चुनौती ने कांग्रेस पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया है और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस वाकई कोई ठोस सबूत पेश करती है या यह मामला महज़ जुबानी जंग बनकर रह जाता है।