राजस्थान पंचायत चुनाव के बीच कोटा में सियासी भूचाल
राजस्थान में पंचायत चुनावों का माहौल इन दिनों अपने चरम पर है, लेकिन चुनाव प्रचार के शोर के बीच कोटा जिले से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। यहां सुल्तानपुर पंचायत समिति के वार्ड संख्या 8 से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी चंद्रप्रकाश मीणा अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। चुनाव की मतदान प्रक्रिया से ठीक पहले स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा उनके खिलाफ एक बड़ा एक्शन लेते हुए उनकी हिस्ट्रीशीट खोलने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद से न केवल राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, बल्कि ग्रामीण इलाकों से लेकर जिला मुख्यालय तक हर जुबान पर इसी बात की चर्चा है कि आखिर एक सियासी उम्मीदवार के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का यह पन्ना इतने वक्त बाद क्यों पलटा गया है।
कौन हैं चंद्रप्रकाश मीणा और क्या है उनका राजनीतिक सफर?
कोटा जिले के सिमलिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कलारेवा गांव के रहने वाले चंद्रप्रकाश मीणा (उम्र करीब 56 वर्ष) एक स्थानीय राजनीतिक चेहरे और किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। अपनी उम्मीदवारी के दौरान उनके द्वारा दिए गए चुनावी शपथ पत्र के अनुसार वे सातवीं तक शिक्षित हैं और मुख्य रूप से कृषि कार्य से जुड़े हुए हैं। आर्थिक रूप से संपन्न माने जाने वाले चंद्रप्रकाश के पास करोड़ों की चल-अचल संपत्ति है, जिसमें भारी-भरकम जमीन, गाड़ियां और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। सुल्तानपुर पंचायत समिति के वार्ड-8 से जब कांग्रेस पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया, तो उन्होंने पूरे जोश के साथ अपना नामांकन दाखिल किया था। उनके परिवार से जुड़े कुछ अन्य लोगों ने भी नामांकन किया था, लेकिन बाद में समीकरण बदलते गए और मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच सिमट गया।
पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं एक के बाद एक कई गंभीर मुकदमे
ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP) सुजीत शंकर द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेशों और पुलिस दस्तावेजों के मुताबिक, कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रप्रकाश मीणा का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उनके खिलाफ साल 1996 से लेकर 2019 के बीच अलग-अलग थानों में कुल 11 गंभीर मुकदमे दर्ज किए गए थे। इन दर्ज मामलों में मारपीट, धोखाधड़ी, जानलेवा हमला, बलवा, लूट और चौथ वसूली जैसे संगीन आरोप शामिल बताए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इनमें से अधिकांश मामलों की जांच पूरी होने के बाद वर्तमान में लगभग 4 मामले विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं। पुलिस का यह भी तर्क है कि आपराधिक मामलों की लंबी फेरिहर और समाज विरोधी गतिविधियों के कारण ही उनकी हिस्ट्रीशीट खोलने का कठोर निर्णय लिया गया है।
नामांकन पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा और गंभीर पहलू यह सामने आया है कि जब चंद्रप्रकाश मीणा ने पंचायत चुनाव के लिए अपना आधिकारिक नामांकन दाखिल किया था, तब उन्होंने अपने शपथ पत्र (Affidavit) में इन पुराने मुकदमों और आपराधिक इतिहास का पूर्ण खुलासा नहीं किया था। नियमानुसार चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशी के लिए यह अनिवार्य होता है कि वह अपने ऊपर दर्ज आपराधिक मुकदमों की पूरी जानकारी जनता और निर्वाचन आयोग के सामने रखे। जानकारी छिपाने का यह मामला जब प्रशासनिक अधिकारियों और विरोधियों के संज्ञान में आया, तो राजनीतिक पारा चढ़ गया। चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन के नियमों के तहत किसी भी उम्मीदवार द्वारा इस तरह की महत्वपूर्ण सूचना छिपाना निर्वाचन नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है, जिससे उनकी मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रप्रकाश मीणा ने दी अपनी सफाई
अपने ऊपर लग रहे गंभीर आरोपों और पुलिस द्वारा हिस्ट्रीशीट खोले जाने की कार्रवाई के बाद कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रप्रकाश मीणा ने सामने आकर अपनी सफाई पेश की है। मीडिया और स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए उन्होंने अपने ऊपर लगे कई आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वर्तमान समय में उनके खिलाफ इतने मुकदमे नहीं हैं जितने बताए जा रहे हैं, और उनके केवल 2 मामले ही लंबित हैं। अपनी गलती या अनभिज्ञता जाहिर करते हुए उन्होंने बड़े ही सीधे शब्दों में कहा कि उन्हें चुनावी फॉर्म या शपथ पत्र ठीक से भरना नहीं आता था। जानकारी के अभाव और तकनीकी समझ न होने के कारण उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि फॉर्म के किस कॉलम में क्या भरना है और किसे छोड़ना है। उन्होंने दावा किया कि उनका इरादा किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाने का नहीं था।
चुनावी मैदान में सीधा मुकाबला और राजनीतिक सरगर्मी तेज
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद वार्ड संख्या 8 का चुनावी समीकरण पूरी तरह से रोचक हो गया है। इस सीट पर मुख्य मुकाबला अब कांग्रेस के चंद्रप्रकाश मीणा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार मनोज तिवारी के बीच आमने-सामने का रह गया है। जहां एक तरफ विपक्षी दल इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर कांग्रेस पार्टी की नैतिकता पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय मतदाता इस पूरे घटनाक्रम को बहुत ही बारीकी से देख रहे हैं। पंचायत चुनाव के पहले चरण के तहत मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, ऐसे में पुलिस की यह कार्रवाई और प्रत्याशी की सफाई चुनाव के परिणामों को किस दिशा में ले जाती है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल इस मामले ने पूरे इलाके की राजनीतिक हवा को पूरी तरह से गरमा दिया है।