राजस्थान में फिर एक्टिव हुआ मानसून: बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से झमाझम बारिश का दौर शुरू, मौसम विभाग का इन जिलों में यलो अलर्ट
राजस्थान के मौसम का मिजाज एक बार फिर से पूरी तरह से बदल गया है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने एक नए कम दबाव के क्षेत्र यानी लो प्रेशर एरिया के सक्रिय होने की वजह से राज्य में मानसून ने एक बार फिर से जोरदार वापसी की है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में जो सुस्ती और उमस भरी गर्मी देखने को मिल रही थी, उस पर इस नए वेदर सिस्टम ने पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है। राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो चुका है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है और आम जनमानस को भीषण गर्मी व उमस से बड़ी राहत मिली है। किसानों के चेहरे भी एक बार फिर से खिल उठे हैं क्योंकि इस अतिरिक्त पानी से खरीफ की फसलों को खास तौर पर फायदा मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
#बंगाल की खाड़ी के नए वेदर सिस्टम से बदला राजस्थान का मौसम
मानसून की विदाई से पहले बंगाल की खाड़ी में उठा यह नया मौसमी तूफान या सिस्टम राजस्थान के लिए एक वरदान साबित होता नजर आ रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के मुताबिक, इस चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र के असर से राज्य के वायुमंडल में नमी की मात्रा में अचानक से भारी बढ़ोतरी हुई है। मानसून की टर्फ लाइन इस समय अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसक चुकी है, लेकिन बंगाल की खाड़ी से आ रही नम पूर्वी हवाओं ने राजस्थान के अधिकांश इलाकों में बादलों का डेरा डाल दिया है। राज्य के मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह नया सिस्टम अगले तीन से चार दिनों तक काफी सक्रिय रहने वाला है, जिसकी वजह से राज्य के कई संभागों में लगातार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है। इस एक्टिविटी का सबसे ज्यादा असर पूर्वी राजस्थान के जिलों पर देखने को मिल रहा है, जहां आसमान में घने काले बादल छाए हुए हैं और रुक-रुक कर रिमझिम से लेकर तेज बारिश का सिलसिला जारी है।
#मौसम विभाग का यलो अलर्ट: इन जिलों में झमाझम बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने राज्य के कई प्रमुख जिलों के लिए आगामी चौबीस से अड़तालीस घंटों के वास्ते यलो अलर्ट जारी किया है। विभाग की ताजा चेतावनी के अनुसार, जयपुर, अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली, अलवर, दौसा, भरतपुर, धौलपुर, बूंदी, कोटा, बारां और झालावाड़ समेत कई अन्य जिलों में मेघगर्जन, वज्रपात यानी आकाशीय बिजली चमकने के साथ-साथ तेज हवाएं चलने और मध्यम से भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। मौसम विभाग ने आम जनता और विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों व पशुपालकों को यह सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे या कमजोर निर्माण स्थलों के पास खड़े होने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर ही शरण लें। खेतों में काम कर रहे किसानों को भी एहतियात बरतने की हिदायत दी गई है ताकि आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान को टाला जा सके।
#तापमान में गिरावट और किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
इस नए मानसून दौर के सक्रिय होने से राजस्थान के लगभग सभी जिलों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बढ़ रही धूप और उमस भरी गर्मी से परेशान हो चुके आम लोगों को अब ठंडी हवाओं के चलने से काफी सुकून मिला है। दूसरी तरफ, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर के महीने में इस तरह से मानसून का फिर से एक्टिव होना राज्य की कृषि व्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। जिन इलाकों में सूखे जैसे हालात बनने लगे थे या जहां फसलों को सिंचाई के लिए पानी की सख्त जरूरत थी, उन क्षेत्रों के किसानों के लिए यह बारिश एक जीवनदान की तरह साबित हो रही है। बाजरा, मक्का, ग्वार और तिलहन जैसी फसलों के पकने के इस अहम चरण में नमी मिलने से पैदावार अच्छी होने की उम्मीद काफी बढ़ गई है, जिससे राज्य के अन्नदाताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।