जयपुर नगर निगम चुनाव: रिजल्ट से पहले बीजेपी का सीक्रेट प्लान, प्रशिक्षण के नाम पर बाड़ेबंदी शुरू

जयपुर नगर निगम चुनाव: रिजल्ट से पहले बीजेपी का सीक्रेट प्लान, प्रशिक्षण के नाम पर बाड़ेबंदी शुरू

जयपुर नगर निगम चुनाव के परिणाम आने से पहले ही राजस्थान की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने सभी अधिकृत पार्षद प्रत्याशियों को एक खास रणनीति के तहत जयपुर के पार्टी मुख्यालय बुलवाकर बसों के जरिए अज्ञात सुरक्षित स्थानों और रिसॉर्ट्स के लिए रवाना करना शुरू कर दिया है। आधिकारिक रूप से इसे पार्टी की वैचारिक कार्यशाला और प्रशिक्षण शिविर का नाम दिया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे नतीजों से पहले और बाद की तोड़फोड़ से बचने के लिए एक अचूक बाड़ेबंदी माना जा रहा है। बीजेपी नेतृत्व का यह कदम स्थानीय निकाय चुनावों में अपनी जीत की संभावनाओं को सुरक्षित रखने और बोर्ड गठन के समीकरणों को मजबूत करने की सोची-समझी तैयारी को दर्शाता है।

#जयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी की बाड़ेबंदी की रणनीति

राजनीतिक पार्टियों के लिए स्थानीय निकाय चुनावों में जीत के बाद पार्षदों की एकजुटता बनाए रखना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। जयपुर नगर निगम के इन चुनावों में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। बीजेपी जिला संगठन के निर्देशानुसार सभी प्रत्याशियों को फोन करके यह हिदायत दी गई थी कि वे अपने साथ कुछ दिनों का जरूरी सामान लेकर आएं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा प्लान 14 सितंबर को होने वाली मतगणना और आगामी 21 सितंबर को होने वाले महापौर (मेयर) चुनाव तक लागू रह सकता है। बीजेपी शहर जिला अध्यक्ष का कहना है कि यह एक नियमित प्रशिक्षण शिविर है, जिसमें पार्षदों को पार्टी की रीति-नीति, जनता से जुड़े विकास कार्यों और सुशासन के तौर-तरीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी। हालांकि, अंदरखाने चर्चा है कि कड़े मुकाबले वाले वार्डों और संभावित जोड़-तोड़ की आशंका को खत्म करने के लिए ही यह एहतियाती कदम उठाया गया है।

#रिजल्ट और मेयर चुनाव तक सुरक्षित स्थानों पर रहेंगे पार्षद

जयपुर के राजनीतिक इतिहास में यह कोई पहला मौका नहीं है जब चुनाव परिणामों से पहले इस तरह की राजनीतिक कवायद की जा रही हो। बीजेपी ने अपने इस सीक्रेट प्लान के तहत स्पष्ट किया है कि जो प्रत्याशी चुनाव जीतेंगे, वे मतगणना के तुरंत बाद अपने घर नहीं लौट सकेंगे, बल्कि उन्हें सीधे सुरक्षित कैंप या रिसॉर्ट में ही रहना होगा। वहीं दूसरी ओर, जो प्रत्याशी चुनाव हार जाएंगे, उन्हें 14 सितंबर की शाम को ही इस बाड़ेबंदी से मुक्त कर दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नतीजे आने के बाद यदि किसी भी स्थिति में बहुमत का आंकड़ा जुटाने की जरूरत पड़े, तो पार्टी का कोई भी पार्षद विपक्ष के संपर्क में न जा सके।

#कांग्रेस की सक्रियता और निर्दलीय पार्षदों की बढ़ती भूमिका

बीजेपी की इस हाई-प्रोफाइल बाड़ेबंदी के सामने आने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी अपने स्तर पर आंतरिक बैठकों और मंथन में जुट गए हैं ताकि चुनावी परिणामों के बाद की स्थिति से निपटा जा सके। हालांकि, कांग्रेस की तरफ से अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी तरह की बाड़ेबंदी का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन अंदरूनी रणनीतियां बनाई जा रही हैं। इस पूरे चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी सबसे बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। यदि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो दोनों ही प्रमुख दल निर्दलीय और बागी पार्षदों को अपने पाले में लाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। अब सबकी निगाहें 14 सितंबर के चुनाव परिणाम पर टिकी हैं, जिसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि जयपुर नगर निगम की गद्दी पर कौन सी पार्टी अपना कब्जा जमाती है।