धौलपुर में हाई-वोल्टेज ड्रामा: जेल में बंद डकैत जगन गुर्जर की मौत पर भड़का परिवार, CBI जांच की मांग पर अड़ा

धौलपुर में हाई-वोल्टेज ड्रामा: जेल में बंद डकैत जगन गुर्जर की मौत पर भड़का परिवार, CBI जांच की मांग पर अड़ा

राजस्थान और मध्य प्रदेश के चंबल संभाग में कभी आतंक का पर्याय रहे पूर्व इनामी डकैत जगन गुर्जर की जेल में हुई संदिग्ध मौत के बाद धौलपुर में सियासी और सामाजिक पारा गरमा गया है। जगन गुर्जर की मौत की खबर मिलते ही उसके परिजनों और समर्थकों में भारी आक्रोश फैल गया। परिवार ने जेल प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे सोची-समझी हत्या करार दिया है। परिजनों का साफ कहना है कि जब तक इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच की घोषणा नहीं की जाती, तब तक वे शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे। अस्पताल के बाहर भारी संख्या में जुटे परिजनों के धरने पर बैठ जाने से स्थानीय प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।

जेल में बिगड़ी थी तबीयत या मामला कुछ और?

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जेल में बंद जगन गुर्जर की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उसे स्थानीय सरकारी अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जेल प्रशासन का दावा है कि मौत प्राकृतिक कारणों या बीमारी की वजह से हुई है। वहीं दूसरी ओर, जगन गुर्जर के भाई और पत्नी ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका आरोप है कि जेल के भीतर जगन के साथ बेरहमी से मारपीट की गई और उसे साजिश के तहत मौत के घाट उतारा गया है। परिवार का कहना है कि उन्हें जगन की सुरक्षा को लेकर पहले से ही अंदेशा था।

अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील, पोस्टमार्टम पर सस्पेंस

घटना के बाद से ही धौलपुर जिला अस्पताल परिसर और मोर्चरी के बाहर तनाव का माहौल बना हुआ है। परिजनों के उग्र रुख और संभावित बवाल को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार परिजनों को समझाने और पोस्टमार्टम के लिए राजी करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन परिवार अपनी मांगों से टस से मस होने को तैयार नहीं है। उनकी स्पष्ट मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच या केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

चंबल में जगन गुर्जर के आतंक और समर्पण की कहानी

जगन गुर्जर का नाम चंबल के बीहड़ों में दशकों तक गूंजता रहा है। उस पर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में डकैती, हत्या का प्रयास, अपहरण और रंगदारी के दर्जनों मामले दर्ज थे। सरकार ने उस पर लाखों रुपये का इनाम भी घोषित किया था। कई बार आत्मसमर्पण करने और फिर से अपराध की दुनिया में लौटने वाले जगन गुर्जर की जेल के भीतर इस तरह मौत होना कई अनसुलझे सवाल खड़े करता है। यही वजह है कि स्थानीय राजनीति भी इस मुद्दे पर गरमाने लगी है और प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।

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